वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में बुनकरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उनके उत्पादों वैश्विक पहचान दिलाने के लिए अनेक प्रावधान किए गए हैं।
एक फरवरी को संसद में पेश आम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने छोटे बुनकर यूनिट के लिए दो हजार करोड़ रुपए के अलग से प्रावधान की घोषणा की। इस राशि से बुनकरों को ऋण प्रदान किया जाएगा। बुनकरों को ऋण आसानी से मिल सके, इसके लिए नियमों को सरल बनाया गया है। इसके तहत बिना किसी जटिल प्रक्रिया और बोझिल कागजी कार्यवाही के बुनकरों को ऋण मिल सकेगा।
महात्मा गांधी हैंडलूम स्कीम की घोषणा करते हुए वित्तमंत्री ने हथकरघा उत्पादों को बढ़ावा देने और दुनिया में इसको पहचान और स्थान दिलाने की बात कही। वैश्विक बाजार में इन उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के लिए इन्हें ई-कॉमर्स प्लेटफार्म से जोड़ने की बात कही गई। हथकरघा उत्पादों को विदेशी खरीदारों तक पहुंचाने की भी घोषणा की गई। नेशनल हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट प्रोग्राम के तहत बुनकरों को जहां सीधी आर्थिक मदद पहुंचाई जाएगी, वहीं उन्हें सस्ती दरों पर कच्चा माल भी उपलब्ध कराया जाएगा। बुनकरों के बनाए सामानों का निर्यात बढ़ाने के लिए वित्तमंत्री ने क्वालिटी कंट्रोल की भी बात कही। उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने को नए मानक तय किए जाएंगे। वित्तमंत्री ने बजट में समर्थ-2.0 की घोषणा करते हुए बुनकरों के कौशल विकास की बात कही। इसके तहत उन्हें आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। बजट में महात्मा गांधी ग्राम स्वराज स्कीम के तहत ग्रामीण बुनकरों के लिए एक जिला, एक उत्पाद (ओडीओपी) पर जोर दिया गया। इससे हर जिले के हथकरघा उत्पादों को बढ़ावा मिल सकेगा।
बजट में सात नए मेगा टेक्सटाइल पार्क बनाने की भी घोषणा की गई। वित्तमंत्री ने सप्लाई चेन को मजबूत करने और मशीनरी पार्ट्स पर कस्टम ड्यूटी में राहत देने की बात भी कही।


