Trending News

भारत का सबसे सफल चेज, न्यूजीलैंड को पहले टी20 मैच में चार विकेट से हराया तिरुक्कुरल की सीख के साथ सजेगा 28 नवंबर से काशी तमिल संगमम 2026, 1,400 प्रतिभागी लेंगे हिस्सा, 13 नवंबर तक कर सकेंगे आवेदन बिहार में नई सहकारिता नीति 2026 के तहत स्थानीय उत्पादों और जीआई टैग वाले उत्पादों को बढ़ावा देने की पहल देशभर में 55,500 से अधिक पैक्स बने कॉमन सर्विस सेंटर, ग्रामीणों को बैंकिंग, बीमा, आधार और टिकट बुकिंग सहित 300 से ज्यादा डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कॉसमॉस को-ऑपरेटिव बैंक की प्रॉपर्टी मॉर्गेज लोन सुविधा, महिलाओं के लिए 9.15% और अन्य ग्राहकों के लिए 9.25% से शुरू ब्याज दर भारत का सबसे सफल चेज, न्यूजीलैंड को पहले टी20 मैच में चार विकेट से हराया तिरुक्कुरल की सीख के साथ सजेगा 28 नवंबर से काशी तमिल संगमम 2026, 1,400 प्रतिभागी लेंगे हिस्सा, 13 नवंबर तक कर सकेंगे आवेदन बिहार में नई सहकारिता नीति 2026 के तहत स्थानीय उत्पादों और जीआई टैग वाले उत्पादों को बढ़ावा देने की पहल देशभर में 55,500 से अधिक पैक्स बने कॉमन सर्विस सेंटर, ग्रामीणों को बैंकिंग, बीमा, आधार और टिकट बुकिंग सहित 300 से ज्यादा डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कॉसमॉस को-ऑपरेटिव बैंक की प्रॉपर्टी मॉर्गेज लोन सुविधा, महिलाओं के लिए 9.15% और अन्य ग्राहकों के लिए 9.25% से शुरू ब्याज दर

VP धनखड़ का किसानों से आह्वान, कृषि उद्यमी बनें किसान, सिर्फ उत्पादन तक सीमित न रहें

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने किसानों से उत्पादन के साथ-साथ विपणन, मूल्य संवर्धन और कृषि व्यापार में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कृषि को व्यवसाय के रूप में अपनाने और ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।

Published: 13:24pm, 23 May 2025

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने किसानों से आह्वान किया है कि वे केवल उत्पादन तक सीमित न रहें, बल्कि कृषि उत्पादों के विपणन, मूल्य संवर्धन एवं व्यापारिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का मार्ग खेतों और गांवों से होकर ही गुजरता है, और इस दिशा में किसानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्थायित्व में कृषि और ग्रामीण भारत की निर्णायक भूमिका है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे कृषि को पारंपरिक कार्य न मानें, बल्कि इसे एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में अपनाएं और ‘कृषि उद्यमी’ की सोच विकसित करें।

धनखड़ ने स्पष्ट किया कि किसानों का कार्य केवल उत्पादन तक सीमित रह जाने से वे देश की आर्थिक मुख्यधारा से नहीं जुड़ पाते। उन्होंने सुझाव दिया कि अब समय आ गया है कि किसान न केवल उत्पादन करें, बल्कि विपणन, मूल्य संवर्धन और कृषि आधारित उद्योगों में भी अपनी सीधी भागीदारी सुनिश्चित करें।

उन्होंने दूध, फल-सब्ज़ी, उर्वरक और कृषि उपकरणों जैसे क्षेत्रों में किसानों की भागीदारी बढ़ाने पर बल दिया। उपराष्ट्रपति ने पशुधन क्षेत्र को भी एक बड़े अवसर के रूप में रेखांकित किया और कहा कि न्यूजीलैंड जैसे देशों ने इसी क्षेत्र में नवाचार कर वैश्विक पहचान बनाई है।

उन्होंने ग्रामीण युवाओं से इस क्षेत्र में तकनीकी नवाचार और उद्यमिता को अपनाने का आह्वान किया। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आज आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों से शिक्षित युवा भी कृषि व्यापार में उतर रहे हैं, तो फिर किसान परिवारों के बच्चे क्यों पीछे रहें?

धनखड़ ने सरकार की विभिन्न योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि आज की नीतियां कृषि को सशक्त बनाने हेतु अनुकूल हैं। उन्होंने किसानों से भंडारण, ऋण एवं सहकारी सुधारों का भरपूर लाभ उठाने का आग्रह किया।

अंत में उन्होंने बड़े उद्योगपतियों से भी सीएसआर निधियों का उपयोग ग्रामीण विकास और किसानों की आय वृद्धि के लिए करने की अपील की।

YuvaSahakar Desk