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राष्ट्रीय दुग्ध दिवस पर देशभर में डॉ. वर्गीज कुरियन को श्रद्धांजलि

26 नवंबर 1921 को केरल के कालीकट  में जन्मे डॉ. कुरियन ने भौतिकी और मैकेनिकल इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की तथा मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर्स किया

Published: 14:43pm, 26 Nov 2025

भारत में सहकारी आंदोलन से जुड़े संगठनों और डेयरी संस्थानों ने आज, 26 नवंबर 2025, राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के अवसर पर “भारत के श्वेत क्रांति के जनक” डॉ. वर्गीज कुरियन की जयंती बड़े सम्मान के साथ मनाई। किसानों को सशक्त बनाकर भारत को विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक बनाने में उनका योगदान अभूतपूर्व रहा है।

वरिष्ठ सहकारी नेता ज्योतिंद्र मेहता ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि डॉ. कुरियन ने सिद्ध किया कि सहकारिता किसानों और गरीबों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला सकती है। उन्होंने अमूल की नींव रखने में श्री त्रिभुवनदास पटेल की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।

अमूल ने विशेष श्रद्धांजलि जारी कर डॉ. कुरियन की 104वीं जन्म जयंती मनाई, जबकि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) ने उनके उस दूरदर्शी विचार को याद किया- “भारत का उज्ज्वल भविष्य ग्रामीणों की बुद्धिमत्ता और पेशेवरों की कौशल साझेदारी से ही बनेगा।” बोर्ड ने देशभर के दुग्ध उत्पादक किसानों को भी सलाम किया।

पायस डेयरी ने उनके मार्गदर्शक सिद्धांत को रेखांकित किया कि पेशेवरों को स्वयं के लिए नहीं, बल्कि जनता के लिए काम करना चाहिए। इसी भावना के साथ देशभर के दूध उत्पादक किसानों को सम्मान दिया गया।

गोवा डेयरी ने भी स्मरण किया कि कैसे डॉ. कुरियन ने सहकारिता मॉडल के माध्यम से ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया और लाखों किसानों को सम्मान, स्वामित्व और उचित आय दिलाई।

जम्मू-कश्मीर में JK Milk Producers Cooperative Limited (JKMPCL) ने इस अवसर पर Snowcap T20 Dairy Farmers’ Cricket League के समापन के साथ डॉ. कुरियन को नमन किया। फाइनल मुकाबले में टीम स्नोकैप ने जीत हासिल की, जो अनुशासन, एकता और टीमवर्क की मिसाल रही।

डॉ. वर्गीज कुरियन— जीवन और योगदान
26 नवंबर 1921 को केरल के कालीकट  में जन्मे डॉ. कुरियन ने भौतिकी और मैकेनिकल इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की तथा मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर्स किया।
1949 में वे सरकारी डेयरी अधिकारी के रूप में आनंद, गुजरात आए, जहाँ उन्होंने 1950 में कायरा जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ (बाद में अमूल) की स्थापना में अहम भूमिका निभाई।

उन्होंने किसानों को खरीद, प्रसंस्करण और विपणन का अधिकार देकर आनंद सहकारी मॉडल विकसित किया, जिसने आगे चलकर भारत की श्वेत क्रांति को जन्म दिया।

डॉ. कुरियन ने NDDB, IRMA, आनंदालय एजुकेशन सोसाइटी, विद्या डेयरी जैसी संस्थाओं की स्थापना की और गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) के चेयरमैन भी रहे।
त्रिभुवनदास पटेल और एच.एम. दलाया के साथ उनकी “अमूल त्रिमूर्ति” ने भारत के डेयरी क्षेत्र को आधुनिक रूप दिया।

राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रम
पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय दुग्ध दिवस समारोह आयोजित किया जाएगा। मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह होंगे, जबकि राज्य मंत्री एस.पी. सिंह बघेल व जॉर्ज कुरियन भी उपस्थित रहेंगे।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार तीन श्रेणियों में प्रदान किए जाएंगे, साथ ही पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए विशेष पुरस्कार भी दिए जाएंगे।

इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ की जाएँगी— ब्रीड मल्टिप्लिकेशन फार्म की शुरुआत, पशु चिकित्सा अवसंरचना दिशा-निर्देश, बेसिक एनिमल हसबेंडरी स्टैटिस्टिक्स 2025, NDPP द्वारा समर्थित 20 दूध टैंकरों को हरी झंडी।

पशु उत्पादकता बढ़ाने पर एक विशेष पैनल चर्चा भी आयोजित होगी, जिसमें देशभर से हितधारक भाग लेंगे।

Diksha