केंद्र सरकार देश के मत्स्य पालन क्षेत्र के समग्र विकास और मछुआरों के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) का व्यापक स्तर पर कार्यान्वयन कर रही है। इस योजना का एक प्रमुख उद्देश्य पारंपरिक और लघु-स्तरीय मछुआरों को गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए सशक्त बनाना है। यह जानकारी केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
सरकार के अनुसार पीएमएमएसवाई के तहत पारंपरिक मछुआरों को गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले जहाजों के अधिग्रहण, मौजूदा नौकाओं के उन्नयन, तथा निर्यात-सक्षम बनाने के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है।
सहकारिता मंत्रालय और मत्स्य पालन विभाग का संयुक्त प्रयास
“सरकार के समग्र दृष्टिकोण” को अपनाते हुए सहकारिता मंत्रालय, संयुक्त कार्य समूह के माध्यम से मत्स्य पालन विभाग के साथ मिलकर कार्य कर रहा है, ताकि लघु-स्तरीय मछुआरों की गहरे समुद्र में मछली पकड़ने, मूल्य-श्रृंखला विकास, प्रसंस्करण और निर्यात में भागीदारी बढ़ाई जा सके।
इस समन्वय के तहत सहकारिता मंत्रालय मात्स्यिकी सहकारी समितियों और मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) को संस्थागत वित्त, सहकारिता-आधारित आस्ति निर्माण और एनसीडीसी के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है, जबकि मत्स्य पालन विभाग नीतिगत ढांचा, तकनीकी मार्गदर्शन और योजना-आधारित सहयोग उपलब्ध करा रहा है।
20,050 करोड़ रुपये का अब तक का सबसे बड़ा निवेश
मछुआरों और मत्स्य किसानों के कल्याण के लिए वित्तीय वर्ष 2020-21 से अब तक 20,050 करोड़ रुपये के निवेश के साथ पीएमएमएसवाई का कार्यान्वयन किया जा रहा है। इसके साथ-साथ, मत्स्यिकी और जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (एफआईडीएफ) के अंतर्गत 7,522.48 करोड़ रुपये की निधि से मत्स्य अवसंरचना विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। एफआईडीएफ के तहत ऋण गारंटी सुविधा को भी मंजूरी दी गई है।
आजीविका से लेकर अवसंरचना तक सहायता
पीएमएमएसवाई के अंतर्गत मछुआरों को नाव और जाल, संचार एवं ट्रैकिंग उपकरण, समुद्री सुरक्षा किट, बीमा कवर, गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले जहाज, सीवीड खेती, बाइवाल्व पालन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास, तथा कोल्ड-चेन और विपणन सुविधाओं के लिए सहायता दी जा रही है। इसके अलावा, मछली पकड़ने के बंदरगाहों और मछली लैंडिंग केंद्रों के निर्माण का भी प्रावधान किया गया है।


