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APAAR ID पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CBSE को डेटा सुरक्षा चिंताओं की जांच और ‘ऑप्ट-आउट’ विकल्प देने का संकेत

सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के लिए आधार से जुड़ी ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री यानी APAAR ID को लेकर उठ रही निजता और डेटा सुरक्षा संबंधी चिंताओं को गंभीरता से लिया है। प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि वह केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को इस व्यवस्था की समीक्षा करने और ओडिशा हाईकोर्ट के फैसले को लागू करने के संबंध में उचित आदेश पारित करेगी।

CBSE May Be Asked to Address Privacy and Data Protection Concerns Over APAAR ID


Published: 13:53pm, 20 Jul 2026

सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के लिए आधार से जुड़ी ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री यानी APAAR ID को लेकर उठ रही निजता और डेटा सुरक्षा संबंधी चिंताओं को गंभीरता से लिया है। प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि वह केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को इस व्यवस्था की समीक्षा करने और ओडिशा हाईकोर्ट के फैसले को लागू करने के संबंध में उचित आदेश पारित करेगी।

इससे पहले इस मामले पर ओडिशा हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि APAAR ID बनाना पूरी तरह स्वैच्छिक रहना चाहिए। साथ ही, सहमति पत्र में अभिभावकों और छात्रों के लिए साफ तौर पर इनकार या ऑप्ट-आउट का विकल्प शामिल किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट आधार से जुड़ी APAAR ID व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा है। याचिका में कहा गया है कि नाबालिग छात्रों का डेटा एकत्र करना और उसे आधार से जोड़ना उनके मौलिक निजता के अधिकार का उल्लंघन कर सकता है। इसमें ‘राइट टू बी फॉरगॉटन’, यानी उचित परिस्थितियों में डिजिटल डेटा हटाने के अधिकार का मुद्दा भी उठाया गया है।

APAAR ID के माध्यम से छात्रों के अंकपत्र, प्रमाणपत्र और शैक्षणिक उपलब्धियों को डिजिटल रूप से जोड़ा जाता है। हालांकि, डेटा भंडारण, उपयोग और साझा किए जाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल बने हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट का अंतिम लिखित आदेश अभी जारी नहीं हुआ है, लेकिन अदालत के रुख से संकेत है कि छात्रों और अभिभावकों की स्पष्ट, स्वतंत्र और सूचित सहमति को प्राथमिकता दी जाएगी।

Jitendra