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लखपति दीदी के बाद हर घर से निकलेगी उद्यमी दीदी, सशक्तिकरण का नया अध्याय रच रहीं ग्रामीण महिलाएं

केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब हर घर से एक ‘उद्यमी दीदी’ निकलेगी। सरकार का लक्ष्य है कि 3 करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाया जाए और यह लक्ष्य तय समय से पहले पूरा हो जाएगा।

Published: 17:05pm, 18 Aug 2025

केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली के भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद परिसर में आयोजित “आत्मनिर्भरता में उत्कृष्टता: सर्वश्रेष्ठ CLF पुरस्कार एवं स्वतंत्रता दिवस अभिनंदन समारोह” को संबोधित करते हुए एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हर घर से एक ‘उद्यमी दीदी’ निकले। सरकार का लक्ष्य देश में 3 करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाना है, और यह लक्ष्य निर्धारित समय से पहले पूरा किया जाएगा।

दीदियों ने रचा महिला सशक्तिकरण का नया अध्याय

कार्यक्रम में देशभर की दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) की दीदियों का केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने उन्हें सशक्तिकरण का प्रतीक बताया और कहा कि ये महिलाएं गांव-गांव में बदलाव और विकास की नई मिसाल कायम कर रही हैं।

उन्होंने बताया कि पहले महिलाओं और पुरुषों के बीच भेदभाव था, पर आज की महिलाएं समाज में क्रांतिकारी बदलाव ला रही हैं। उन्होंने सभी दीदियों से आग्रह किया कि वे स्व-सहायता समूह (SHGs) को और मजबूत करें, नशामुक्ति अभियान चलाएं, स्वदेशी वस्तुओं को अपनाएं और बेटियों की शिक्षा और संस्कारों पर विशेष ध्यान दें।

‘लखपति दीदी’ से ‘उद्यमी दीदी’ की यात्रा

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ‘लखपति दीदी’ का सपना अब साकार होने लगा है, लेकिन अब सरकार की दृष्टि आगे बढ़कर हर दीदी को एक उद्यमी बनाने की है जो रोजगार सृजित करे और समाज में प्रेरणा का स्रोत बने। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमें यहां रुकना नहीं है। हमें दीदियों को रोजगार देने वाली प्रेरक उद्यमी बनाना है।

दीदियों की सफलता की कहानियां

इस कार्यक्रम में देशभर की कई ‘लखपति दीदियों’ ने मंच से अपने अनुभव साझा किए। मध्यप्रदेश की स्वरूपा मीणा दीदी ने बताया कि वे अब ड्रोन पायलट के रूप में जानी जाती हैं और आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया है। महाराष्ट्र की रूपाली दीदी ने कहा कि वे अब आर्थिक रूप से पूरी तरह स्वतंत्र हैं और इस मिशन ने उन्हें एक नई पहचान दी है। आंध्र प्रदेश की जानी बेगम दीदी ने गर्व से कहा कि अब उनके पतियों की पहचान उनके नाम से है और यह मिशन की सबसे बड़ी सफलता है। तेलंगाना की सौम्या दीदी एवं मेघालय की एक दीदी ने भी आत्मनिर्भरता की यात्रा साझा की।

गांव में परिवर्तन का प्रतीक बना आजीविका मिशन 

ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने गांवों में बदलाव की लहर पैदा की है। महिलाओं ने सिद्ध कर दिया है कि वे देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने कहा कि जब तक गांवों का विकास नहीं होगा, तब तक देश का समग्र विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया गया है।

10 करोड़ महिलाएं आत्मनिर्भर भारत की मजबूत धुरी

ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव शैलेश कुमार सिंह ने कहा कि आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाएं गांव-गांव में परिवर्तन की वाहक बन रही हैं और सामुदायिक क्लस्टर्स आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुके हैं। मंत्रालय के अपर सचिव अनिल कुमार टी.के. ने बताया कि वर्तमान में देशभर में 91 लाख SHGs कार्यरत हैं जिनसे लगभग 10 करोड़ महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ये महिलाएं आत्मनिर्भर भारत की मजबूत आधारशिला रख रही हैं।

दीदियों को दिया गया CLF पुरस्कार

कार्यक्रम में DAY-NRLM के तहत उत्कृष्ट कार्य करने वाले सामुदायिक क्लस्टर्स को ‘सर्वश्रेष्ठ CLF पुरस्कार’ प्रदान किए गए, जो स्थानीय महिलाओं के सशक्तिकरण में उनके योगदान को सम्मानित करता है। यह पुरस्कार आजीविका मिशन के अंतर्गत किया गया उत्कृष्ट कार्य और स्थानीय महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए दिया जाता है।

YuvaSahakar Desk