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तीसरी बार फिर बनास डेयरी के चेयरमैन बने शंकर चौधरी, निर्विरोध हुआ चयन

डेयरी के निदेशक मंडल ने उपाध्यक्ष पद के लिए भावाभाई रबारी को चुना है। डेयरी का सालाना टर्नओवर 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक है और यह देश की सहकारी दुग्ध उद्योग व्यवस्था के लिए एक मिसाल मानी जाती है।

Published: 17:08pm, 27 Oct 2025

एशिया की सबसे बड़ी डेयरी कही जाने वाली बनास डेयरी में चेयरमैन पद के चुनाव में एक बार फिर शंकर चौधरी ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की है। खास बात यह है कि वे इस बार भी निर्विरोध चुने गए हैं। डेयरी सेक्टर में बनास डेयरी का चेयरमैन पद सबसे प्रभावशाली और प्रतिष्ठित पदों में से एक माना जाता है।

बनास डेयरी का संचालन बनासकांठा जिला दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड द्वारा किया जाता है, जो देश की अग्रणी मिल्क कोऑपरेटिव संस्था है। डेयरी का सालाना टर्नओवर 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है।

निदेशक मंडल का चुनाव और परिणाम

बनास डेयरी के निदेशक मंडल के इस चुनाव में कुल 16 सीटों पर निर्वाचन हुआ, जिनमें से 15 सीटों पर निर्विरोध चयन हुआ। केवल दांता सीट पर प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जहां पांच नामांकन दाखिल हुए थे। बाद में दो उम्मीदवारों ने नाम वापस ले लिया और तीन उम्मीदवार चुनाव मैदान में रहे।

निदेशक मंडल की बैठक में भावाभाई रबारी को उपाध्यक्ष पद के लिए चुना गया। चेयरमैन शंकर चौधरी और उपाध्यक्ष भावाभाई रबारी आने वाले ढाई वर्षों तक अपने पदों पर बने रहेंगे।

शंकर चौधरी ने पशुपालकों को दिया श्रेय

चुनाव के बाद शंकर चौधरी ने कहा कि बनास डेयरी की यह सफलता लाखों पशुपालकों के सहयोग और मेहनत की देन है। उन्होंने कहा कि डेयरी को विश्व स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाना और पशुपालकों की आय में निरंतर वृद्धि करना उनका लक्ष्य रहेगा।

बनास डेयरी: देश की अग्रणी सहकारी संस्था

बनास डेयरी का कार्यक्षेत्र गुजरात सहित आठ राज्यों में फैला हुआ है। डेयरी से लगभग 3.76 लाख सदस्य जुड़े हैं। प्रतिदिन 35 करोड़ रुपये पशुपालकों के खातों में सीधे ट्रांसफर किए जाते हैं।

बनास डेयरी ने न केवल श्वेत क्रांति (White Revolution) को आगे बढ़ाया है, बल्कि “स्वीट क्रांति” के तहत 350 टन शहद उत्पादन करके एक नई मिसाल कायम की है। डेयरी के सहयोग से पशुपालकों ने देश का पहला मेडिकल कॉलेज भी बनवाया है, जो ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है।

शंकर चौधरी: गुजरात राजनीति के प्रमुख ओबीसी नेता

शंकर चौधरी गुजरात भाजपा के वरिष्ठ ओबीसी नेता हैं। वे पांच बार विधायक रह चुके हैं और उत्तर गुजरात की राजनीति में उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है। साल 1998 में 28 वर्ष की उम्र में पहली बार विधायक बने और आनंदीबेन पटेल सरकार में राज्य मंत्री के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वे भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष और बाद में प्रदेश भाजपा के महामंत्री भी रहे हैं।

YuvaSahakar Desk

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