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PM धन-धान्य कृषि योजना–FPO समागम के पहले दिन FPOs कृषि बदलाव के केंद्र में

सफलता कहानियों पर आधारित एक सत्र में FPO नेताओं और किसान क्रेडिट कार्ड लाभार्थियों ने बताया कि कैसे सामूहिक विपणन और इनपुट योजना से उत्पादकता और आय में सुधार हुआ

Published: 14:50pm, 10 Dec 2025

नई दिल्ली में सोमवार को आयोजित पीएम धन-धान्य कृषि योजना – FPO समागम के पहले दिन किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) की भूमिका कृषि सुधार, आय वृद्धि और बाजार परिवर्तन के मुख्य इंजन के रूप में केंद्र में रही।

NCUI ऑडिटोरियम और NCDC परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में 15 राज्यों और 33 पीएमडीडीकाय (PMDDKY) जिलों से आए 72 से अधिक FPOs ने भाग लिया। कार्यक्रम ने किसानों, एग्री-उद्यमों, नीति निर्माताओं, खरीदारों और तकनीकी विशेषज्ञों को एक ही मंच पर जोड़ा।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा गेट्स फाउंडेशन के साथ साझेदारी में, और इंटेलकैप एडवाइजरी सर्विसेज द्वारा संयोजित इस आयोजन ने FPO-आधारित विकास को गति देने पर रणनीतिक जोर को रेखांकित किया।

कार्यक्रम की प्रदर्शनी का उद्घाटन कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने किया। उन्होंने विभिन्न किसान समूहों से सीधे संवाद किया, उनके उत्पादों का निरीक्षण किया और उन्हें मूल्य संवर्धन और बाजार विस्तार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

NCDC एट्रियम में लगे स्टॉलों ने आगंतुकों को अनाज, दालें, मसाले, खाद्य तेल, शहद, मिलेट्स, बागवानी उत्पादों और कई नवाचारयुक्त वैल्यू-एडेड उत्पादों की व्यापक झलक दी। प्रदर्शनी केवल एक प्रदर्शनी न रहकर एक जीवंत बाजार साबित हुई, जहां सरकारी अधिकारियों, निजी खरीदारों और रिटेल प्रतिनिधियों ने सीधे FPOs से बातचीत की। कई स्टॉलों पर तेज बिक्री देखी गई, जो FPO-ब्रांडेड उत्पादों की बढ़ती मांग को दर्शाती है।

अपने मुख्य संबोधन में सचिव देवेश चतुर्वेदी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि सिंचाई दक्षता, फसल विविधीकरण और पोस्ट-हार्वेस्ट आधुनिकीकरण को भी मजबूत करना है, जिसमें FPOs “सुधार की रीढ़” बनकर उभर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “FPOs इनपुट उपलब्धता, बेहतर उत्पादन प्रणाली, बाजार के अवसर और किसानों की आय बढ़ाने में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।”

चतुर्वेदी ने उपस्थित कॉर्पोरेट चेन, प्रोसेसरों और एग्री-खरीदारों से FPOs के साथ दीर्घकालिक खरीद साझेदारियाँ बनाने की अपील की, ताकि किसानों के लिए स्थायी बाजार चैनल बन सकें। उन्होंने कहा कि संगम जैसे प्लेटफॉर्म बाजारों और ग्रामीण उत्पादक समूहों के बीच कड़ी मजबूत करते हैं।

दिनभर की तकनीकी चर्चाओं में एकीकृत एवं प्राकृतिक खेती, तिलहन, मधुमक्खी पालन, संरक्षित खेती, माइक्रो-इरिगेशन, वित्तीय मॉडल और डिजिटल कृषि पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। ICAR, नेशनल बीकीपिंग मिशन, खेत्ती, नबकिसान फाइनेंस आदि संस्थानों के विशेषज्ञों ने केस स्टडी प्रस्तुत कीं।

सफलता कहानियों पर आधारित एक सत्र में FPO नेताओं और किसान क्रेडिट कार्ड लाभार्थियों ने बताया कि कैसे सामूहिक विपणन और इनपुट योजना से उत्पादकता और आय में सुधार हुआ। वहीं शासन, उर्वरक उपयोग और फार्म प्रबंधन पर क्विज ने कार्यक्रम को रोचक बना दिया।

पहले दिन का समापन नेटवर्किंग सत्र के साथ हुआ, जहां FPO प्रतिनिधियों ने अपने उत्पाद पेश किए, निवेश अवसरों की तलाश की और खरीदारों से संपर्क बढ़ाया। दूसरे दिन भी प्रदर्शनी जारी रहेगी, जिसमें तकनीकी चर्चाएँ और समापन समारोह शामिल होगा।

पहले दिन की सफलता ने संकेत दिया कि भविष्य में FPOs न केवल कृषि उत्पादन, बल्कि किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

Diksha