Trending News

झारखंड JPSC परीक्षा मामले में CID की बड़ी कार्रवाई, रांची और लखनऊ से 5 गिरफ्तार, अब तक कुल 19 अरेस्ट हुए यूपी के प्रतापगढ़ में बारिश के दौरान गिरा जर्जर मकान, हादसे में 6 लोगों की मौत थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस नहीं होने पर अब नहीं मिलेगा पेट्रोल पीवी सिंधु को BWF वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में 9वीं रैंकिंग मिली आज वर्क फ्रॉम होम करें, भारी बारिश के चलते गुरुग्राम पुलिस ने जारी की एडवाइजरी झारखंड JPSC परीक्षा मामले में CID की बड़ी कार्रवाई, रांची और लखनऊ से 5 गिरफ्तार, अब तक कुल 19 अरेस्ट हुए यूपी के प्रतापगढ़ में बारिश के दौरान गिरा जर्जर मकान, हादसे में 6 लोगों की मौत थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस नहीं होने पर अब नहीं मिलेगा पेट्रोल पीवी सिंधु को BWF वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में 9वीं रैंकिंग मिली आज वर्क फ्रॉम होम करें, भारी बारिश के चलते गुरुग्राम पुलिस ने जारी की एडवाइजरी

OECD-FAO की रिपोर्ट: 2034 तक वैश्विक खाद्य और मछली उत्पादन में 14% की वृद्धि संभावित

रिपोर्ट में बताया गया है कि हालांकि उत्पादन में इजाफा होगा, लेकिन इसके साथ-साथ ग्रीनहाउस गैसों (GHG) के उत्सर्जन में भी 6% की वृद्धि होगी। यह एक बड़ा पर्यावरणीय खतरा बन सकता है, जिससे निपटने के लिए टिकाऊ खेती की जरूरत है।

Published: 13:13pm, 22 Jul 2025

ओईसीडी (OECD) और एफएओ (FAO) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में 2025 से 2034 के बीच कृषि और मछली उत्पादन में 14% तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसकी मुख्य वजह मध्यम आय वाले देशों में बढ़ता निवेश, जनसंख्या वृद्धि और बदलती जीवनशैली बताई गई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि हालांकि उत्पादन में इजाफा होगा, लेकिन इसके साथ-साथ ग्रीनहाउस गैसों (GHG) के उत्सर्जन में भी 6% की वृद्धि होगी। यह एक बड़ा पर्यावरणीय खतरा बन सकता है, जिससे निपटने के लिए टिकाऊ खेती की जरूरत है।

कहाँ होगा सबसे ज़्यादा विकास?

दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया, लैटिन अमेरिका और उप-सहारा अफ्रीका जैसे क्षेत्र इस उत्पादन वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान देंगे। इन क्षेत्रों में उन्नत बीज, सिंचाई, खाद और चारा जैसी तकनीकों का ज्यादा उपयोग किया जाएगा।

विकसित देशों की स्थिति

अमेरिका, यूरोपीय संघ और जापान जैसे उच्च आय वाले देशों में उत्पादन की वृद्धि धीमी रहेगी क्योंकि वहां के बाजार पहले से ही संतृप्त हैं। अब इन देशों का फोकस उत्पादन बढ़ाने की बजाय पर्यावरण संरक्षण पर है।

प्रदूषण भी बढ़ेगा

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि खेती से निकलने वाला प्रदूषण भी बढ़ेगा। खासकर मवेशियों, यूरिया और धान की खेती से उत्सर्जन ज़्यादा होगा। हालांकि प्रति यूनिट उत्पादन पर उत्सर्जन में कुछ कमी आएगी, लेकिन यह कुल उत्सर्जन को रोकने के लिए काफी नहीं होगा।

संतुलन की ज़रूरत

रिपोर्ट कहती है कि देशों को अपनी-अपनी ज़रूरत के अनुसार योजनाएं बनानी होंगी। विकासशील देशों को विशेष रूप से उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा पर भी ध्यान देना होगा। इसके लिए ड्रिप सिंचाई, फसल-पशुपालन एकीकरण और पोषक तत्वों की पुनरावृत्ति जैसे तरीकों को अपनाना होगा।

फंड कहाँ से आएगा?

टिकाऊ खेती के लिए बड़ी मात्रा में निवेश की ज़रूरत होगी। इसके लिए सरकारों और निजी क्षेत्र को मिलकर काम करना होगा। ग्रीन बॉन्ड्स, जलवायु वित्त और अन्य नए निवेश मॉडल्स को अपनाने की सिफारिश की गई है।

Diksha