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हिमाचल में नई पहल: ‘पशु मित्र नीति-2025’ से युवाओं को मिलेगा रोजगार, किसानों को सुविधा

‘पशु मित्र’ को प्रतिदिन केवल चार घंटे कार्य करना होगा और इसके बदले उन्हें 5,000 रुपये मासिक मानदेय मिलेगा। खास बात यह है कि पशु मित्र अपने ही क्षेत्र में काम करेंगे और उनका स्थानांतरण नहीं होगा।

Published: 12:50pm, 23 Sep 2025

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश में पशुपालन सेवाओं को सुदृढ़ करने और ग्रामीण युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए ‘पशु मित्र नीति-2025’ की घोषणा की है। इस योजना के तहत स्थानीय युवाओं को ‘पशु मित्र’ के रूप में प्रशिक्षित और नियुक्त किया जाएगा, जो किसानों और पशु चिकित्सकों के बीच सेतु का काम करेंगे।

काम और मानदेय

‘पशु मित्र’ को प्रतिदिन केवल चार घंटे कार्य करना होगा और इसके बदले उन्हें 5,000 रुपये मासिक मानदेय मिलेगा। खास बात यह है कि पशु मित्र अपने ही क्षेत्र में काम करेंगे और उनका स्थानांतरण नहीं होगा।

नियुक्ति प्रक्रिया

  • पहले चरण में 1,000 युवाओं को प्रशिक्षण देकर नियुक्त किया जाएगा।
  • उम्मीदवार का संबंधित ग्राम पंचायत या नगर निकाय का निवासी होना अनिवार्य होगा।
  • चयन के लिए युवाओं को 25 किलो वजन उठाकर 100 मीटर दूरी एक मिनट में तय करनी होगी।

जिम्मेदारियां

पशु मित्र केवल प्राथमिक उपचार तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि कई अहम जिम्मेदारियां निभाएंगे-

  • घर-घर जाकर पशुओं की जांच, टीकाकरण और उपचार
  • पशु चिकित्सालय व पशुधन फार्मों में सहयोग।
  • 14, 26 और 35 लीटर क्षमता वाले तरल नाइट्रोजन कंटेनरों को संभालना।
  • गाय, भैंस, घोड़े, खच्चर जैसे बड़े पशुओं को सुरक्षित करना।
  • गर्भावस्था राशन योजना के तहत चारे की बोरियां लाभार्थियों तक पहुंचाना।

समिति और निगरानी

  • योजना के लिए एक नियुक्ति समिति बनाई गई है:
  • अध्यक्ष: उपमंडल अधिकारी (या प्रतिनिधि)।
  • सदस्य सचिव: वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी।
  • सदस्य: संबंधित पशु चिकित्सक।

यह समिति चयन प्रक्रिया और कार्यप्रणाली की निगरानी करेगी।

अवकाश और सुविधाएं

  • साल में अधिकतम 12 छुट्टियां।
  • रविवार और राजपत्रित अवकाश मान्य।
  • महिला पशु मित्रों को 180 दिन का मातृत्व अवकाश (दो से कम बच्चों पर)।
  • हर महीने की 5 तारीख तक उपस्थिति रिपोर्ट संस्थान इंचार्ज को देनी होगी।

सीएम सुक्खु क्या कहते है?

सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा, “समुदाय आधारित पशुपालन कोई नई बात नहीं है। वर्षों से सरकार और समाज मिलकर पशुधन प्रबंधन करते आए हैं। अब ‘पशु मित्र नीति’ से इस परंपरा को और मजबूत किया जाएगा। यह योजना न सिर्फ किसानों को मदद देगी बल्कि युवाओं को रोजगार और आय का साधन भी उपलब्ध कराएगी।”

Diksha