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MoSPI ने IIP, GDP और CPI के लिए नए आधार वर्ष का प्रस्ताव रखा

केन्द्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने संसद में पूछे गए एक सवाल के लिखित उत्तर में इस बात की जानकारी दी है। मंत्रालय ने बताया कि GDP और IIP के लिए नया प्रस्तावित बेस ईयर 2022-23, जबकि CPI के लिए 2024 निर्धारित किया गया है।

Published: 11:48am, 07 Aug 2025

केंद्र सरकार ने सकल घरेलू उत्पाद (GDP), औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की गणना के आधार वर्ष (Base Year) में बदलाव करने का फैसला किया है।

केन्द्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने संसद में पूछे गए एक सवाल के लिखित उत्तर में इस बात की जानकारी दी है। मंत्रालय ने बताया कि GDP और IIP के लिए नया प्रस्तावित बेस ईयर 2022-23, जबकि CPI के लिए 2024 निर्धारित किया गया है।

वर्तमान में, IIP और GDP दोनों के लिए आधार वर्ष 2011-12 है, जबकि CPI के लिए यह 2012 है।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय में राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने लोकसभा में इसकी जानकारी देते हुए कहा कि नए बेस ईयर के साथ डाटा कलेक्शन से इकोनॉमी में हो रहे संरचनात्मक बदलावों को बेहतर ढंग से प्रदर्शित किया जा सकेगा।

CPI के लिए नया वेटेज और सर्वे

CPI के नए बेस ईयर 2024 के लिए 2023-24 के Household Consumption Expenditure Survey का उपयोग किया गया है। इससे उपभोक्ताओं की बदलती आदतें, नए प्रोडक्ट्स और डिजिटल खर्च जैसे क्षेत्रों को CPI में शामिल किया जाएगा। मंत्रालय ने इस उद्देश्य के लिए कई सर्वे और अध्ययन किए हैं। इनमें नवंबर 2024 से जनवरी 2025 के बीच किया गया कॉर्पोरेट सेक्टर कैपेक्स पर फॉरवर्ड लुकिंग सर्वे भी शामिल है। इसके अलावा सर्विस सेक्टर एंटरप्राइजेज पर भी अध्ययन किया गया।

बदलाव का असर

GDP ग्रोथ आंकड़े होंगे अधिक सटीक

नए बेस ईयर 2022-23 से GDP की गणना में डिजिटल इकॉनॉमी, स्टार्टअप्स और ग्रीन एनर्जी जैसे नए क्षेत्रों को बेहतर ढंग से शामिल किया जा सकेगा, जिससे ग्रोथ के आंकड़े अधिक सटीक होंगे।

IIP में औद्योगिक गतिविधियों का रियल टाइम आकलन

IIP में नए तकनीकी बदलाव, नई इंडस्ट्रीज और मैन्युफैक्चरिंग पैटर्न को शामिल किया जाएगा, जिससे उत्पादन की रियल टाइम परफॉर्मेंस का आकलन ज्यादा सटीक हो पाएगा।

CPI में महंगाई का बेहतर आकलन

नए वेटेज और खपत पैटर्न के अनुसार CPI में ई-कॉमर्स, डिजिटल सब्सक्रिप्शन और उभरते कंज्यूमर प्रोडक्ट्स को शामिल किया जाएगा, जिससे महंगाई का आकलन और अधिक सटीक हो जाएगा।

Diksha