महाराष्ट्र सरकार ने स्कूली छात्रों को नशे और साइबर अपराध के खतरों से बचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार अब स्कूलों के पाठ्यक्रम में नशा मुक्ति (ड्रग डी-एडिक्शन) से जुड़े विषयों को शामिल करेगी, ताकि छात्रों को कम उम्र से ही मादक पदार्थों के दुष्प्रभाव और उनसे बचाव के बारे में जानकारी मिल सके।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई में आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान स्कूल शिक्षा विभाग को इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने राज्य के सभी स्कूलों में एंटी-ड्रग गाइडेंस एंड काउंसलिंग कमेटी गठित करने और ‘ड्रग-फ्री स्कूल’ अभियान शुरू करने का भी आदेश दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अकादमिक ज्ञान देना नहीं, बल्कि छात्रों में अच्छे संस्कार, जागरूकता और जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना विकसित करना भी है। इसलिए स्कूलों में ऐसी शिक्षा जरूरी है, जो विद्यार्थियों को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहने के लिए प्रेरित करे।
साइबर अपराध से बचाव पर भी रहेगा फोकस
राज्य सरकार के अनुसार, छात्रों को शुरुआती उम्र से ही साइबर ठगी और मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक बनाना समय की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से स्कूलों में परामर्श समितियां बनाई जाएंगी और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि शैक्षणिक संस्थानों में नशामुक्त वातावरण तैयार किया जा सके।
छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास को मिलेगा अधिक स्थान
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्कूलों में छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, योगदान और विरासत को अधिक विस्तार से पढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों के बाद केंद्र ने NCERT की पुस्तकों में शिवाजी महाराज के इतिहास को अधिक व्यापक रूप से शामिल करने पर सहमति जताई है। साथ ही राज्य के पाठ्यक्रम में भी उनके योगदान को और विस्तार से शामिल किया जाएगा।
मराठी भाषा की पढ़ाई रहेगी अनिवार्य
सरकार ने दोहराया कि महाराष्ट्र में राज्य बोर्ड (SSC), CBSE, ICSE और IB से संबद्ध सभी स्कूलों में मराठी भाषा की पढ़ाई और मराठी में परीक्षा अनिवार्य रहेगी।
शिक्षा की गुणवत्ता पर सरकार का जोर
राज्य सरकार का कहना है कि PGI 2.0 फ्रेमवर्क के तहत महाराष्ट्र देश का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य बना हुआ है। PM SHRI स्कूलों और अन्य शैक्षणिक योजनाओं के माध्यम से सरकार छात्रों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम कर रही है।


