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कन्नड़ लेखिका बानू मुश्ताक की शॉर्ट स्टोरी ‘हार्ट लैम्प’ को मिला इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार 2025

कर्नाटक की प्रसिद्ध लेखिका बानू मुश्ताक को उनके शॉर्ट स्टोरी संग्रह ‘हार्ट लैम्प’ के लिए इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया है। वह यह पुरस्कार जीतने वाली पहली कन्नड़ लेखिका बनी हैं।

Published: 12:55pm, 21 May 2025

कर्नाटक की प्रसिद्ध कन्नड़ लेखिका, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता बानू मुश्ताक ने अंतरराष्ट्रीय साहित्य जगत में इतिहास रच दिया है। 77 वर्षीय बानू मुश्ताक को उनकी प्रसिद्ध शॉर्ट स्टोरी ‘हार्ट लैम्प’ के लिए इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया है। इस पुरस्कार को प्राप्त करने वाली वह पहली कन्नड़ लेखिका बन गई हैं।

यह सम्मान उन्हें लंदन की प्रतिष्ठित टेट मॉर्डन गैलरी में आयोजित समारोह के दौरान प्रदान किया गया। ‘हार्ट लैम्प’ दक्षिण भारत के मुस्लिम समुदायों में महिलाओं और लड़कियों की ज़िंदगी की जटिलताओं, संघर्षों और भावनाओं को उजागर करने वाला शॉर्ट स्टोरी संग्रह है। इसमें हास्य, करुणा, चिंता और सामाजिक ढांचे के गहरे पहलुओं को दर्शाया गया है।

इस पुरस्कार को बानू मुश्ताक ने अपनी पुस्तक की अंग्रेजी अनुवादक दीपा भस्ती के साथ शेयर किया , जिसमें ₹50 लाख और ₹25 हजार की इनामी राशि शामिल है। उल्लेखनीय है कि ‘हार्ट लैम्प’ का यह पहला अंग्रेजी अनुवाद था, इससे पहले इसे उर्दू, हिंदी, तमिल और मलयालम भाषाओं में अनुवादित किया जा चुका है।

बानू मुश्ताक का लेखन 1970 और 1980 के दशक के प्रगतिशील साहित्यिक आंदोलनों से जुड़ा रहा है। उन्हें कर्नाटक साहित्य अकादमी और दाना चिंतामणि अट्टिमबे जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं। उनके लेखन ने कन्नड़ साहित्य को समृद्ध किया है।

YuvaSahakar Desk