भारत का सेवा निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 421.3 अरब डॉलर हो गया है। वित्त वर्ष 2021-22 में यह 254.5 अरब डॉलर था। इस प्रकार बीते पांच वर्षों में भारत के सेवा निर्यात में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। दूरसंचार, कंप्यूटर एवं सूचना सेवाओं के साथ-साथ बिजनेस सेवाओं ने इस बढ़ोतरी में सबसे अहम भूमिका निभाई है। वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, दूरसंचार, कंप्यूटर और सूचना सेवाओं का निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 206.6 अरब डॉलर हो गया। कुल सेवा निर्यात में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी 49.03 प्रतिशत रही। वहीं, बिजनेस सेवाओं का निर्यात 124.2 अरब डॉलर दर्ज किया गया, जिसकी कुल हिस्सेदारी 29.5 प्रतिशत रही।
सरकार ने भारतीय सेवा प्रदाताओं के लिए वैश्विक बाजारों तक पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से बहुस्तरीय रणनीति अपनाई है। इसके तहत अलग-अलग देशों और क्षेत्रों के लिए विशेष निर्यात रणनीति तैयार की जा रही है। घरेलू स्तर पर सेवा निर्यात में आने वाली बाधाओं की पहचान कर संबंधित मंत्रालयों और विभागों के माध्यम से उनका समाधान भी किया जा रहा है।
मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए भारतीय कंपनियों और पेशेवरों को डिजिटल सेवाएं देने, विदेशी बाजारों में व्यावसायिक उपस्थिति स्थापित करने और सीमित अवधि के लिए कुशल पेशेवरों की आवाजाही की सुविधा दी जा रही है। इन समझौतों में पारदर्शी और समयबद्ध लाइसेंसिंग प्रक्रिया, योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता तथा दोहरे सामाजिक सुरक्षा भुगतान से राहत जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं।
ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ समझौतों में भारतीय छात्रों के लिए सहयोगी ढांचा तैयार किया गया है। ब्रिटेन, ओमान, यूरोपीय संघ और अन्य साझेदार देशों के साथ समझौतों में सामाजिक सुरक्षा, पारंपरिक चिकित्सा और दोहरे कराधान से राहत के प्रावधान भी किए गए हैं।
सेवा निर्यात संवर्धन परिषद अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों, खरीदार-विक्रेता बैठकों, मेडिकल वैल्यू टूरिज्म, शिक्षा, लॉजिस्टिक्स, गेमिंग, स्वास्थ्य और कानूनी सेवाओं से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय सेवा प्रदाताओं को वैश्विक अवसर उपलब्ध करा रही है।


