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भारत ने किया आइएडीडब्ल्यूएस का पहला सफल परीक्षण, बहुस्तरीय वायु रक्षा क्षमता में हुआ इजाफा

आइएडीडब्ल्यूएस दुश्मन देशों की ओर से एक साथ किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों को नाकाम करने के लिए बनाया गया है। यह प्रणाली रडार, लॉन्चर, टारगेटिंग और गाइडेंस सिस्टम, मिसाइल तथा कमांड और कंट्रोल यूनिट को एकीकृत कर काम करती है। खास बात यह है कि यह पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से विकसित की गई है।

Published: 11:51am, 25 Aug 2025

भारतीय रक्षा अनुसंधान संगठन (डीआरडीओ) ने शनिवार दोपहर 12:30 बजे ओडिशा के तट पर इंटीग्रेटेड एअर डिफेंस वेपन सिस्टम (आइएडीडब्ल्यूएस) का पहला सफल परीक्षण किया। इसकी जानकारी रविवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की।

क्या है आइएडीडब्ल्यूएस?

आइएडीडब्ल्यूएस दुश्मन देशों की ओर से एक साथ किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों को नाकाम करने के लिए बनाया गया है। यह प्रणाली रडार, लॉन्चर, टारगेटिंग और गाइडेंस सिस्टम, मिसाइल तथा कमांड और कंट्रोल यूनिट को एकीकृत कर काम करती है। खास बात यह है कि यह पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से विकसित की गई है।

बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली

आइएडीडब्ल्यूएस में तीन प्रमुख हथियार शामिल हैं—

  • क्यूआरएसएएम (क्विक रिएक्शन सरफेस-टू-एअर मिसाइल): ऊंचाई से आने वाले तेज रफ्तार खतरों को नष्ट करता है।
  • वीएसएचओआरएडीएस (एडवांस वेरी शॉर्ट रेंज एअर डिफेंस सिस्टम): कम दूरी और धीमी गति से आने वाले हमलों को रोकता है।
  • डीईडब्ल्यू (लेजर आधारित डायरेक्टेड एनर्जी वेपन): दुश्मन के लड़ाकू विमान और मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने में सक्षम।

परीक्षण में मिली सफलता

परीक्षण के दौरान आइएडीडब्ल्यूएस ने अपनी क्षमता साबित करते हुए दो तेज रफ्तार फिक्स्डविंग ड्रोन और एक मल्टी-कॉप्टर ड्रोन को अलग-अलग ऊंचाई और दूरी पर एक ही समय में नष्ट कर दिया। यह सफलता भारत की हवाई सुरक्षा क्षमता को कई गुना बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।

स्वदेशी विकास की बड़ी उपलब्धि

इस इंटीग्रेटेड सिस्टम का कमांड और कंट्रोल सेंटर डीआरडीओ ने विकसित किया है। वीएसएचओआरएडीएस को रिसर्च सेंटर इमारत (आरसीआई) और डीईडब्ल्यू को उच्च ऊर्जा प्रणाली और विज्ञान केंद्र (सीएचईएसएस) ने तैयार किया है।

 

Diksha