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105 साल पुराने रेलवे कोऑपरेटिव बैंक की नींव कैसे पड़ी? कौन है संस्थापक?

इस बैंक के जनक एल.वी. गोपालन थे, जो उस समय मैसूर स्टेट रेलवे में Travelling Inspector of Accounts थे। उन्होंने महज़ 112 सदस्यों और ₹2,580 की पूंजी के साथ इसकी नींव रखी।

Published: 15:31pm, 03 Sep 2025

मैसूर का रेलवे कोऑपरेटिव बैंक इस साल अपनी 105वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है। 1 अप्रैल 1920 को बेंगलुरु के रेलवे ऑडिट ऑफिस के एक छोटे से कमरे से इस बैंक की कहानी शुरू हुई थी। इसे एक सहकारी सोसाइटी के रूप में बनाया गया था।

संस्थापक कौन है?

इस बैंक के जनक एल.वी. गोपालन थे, जो उस समय मैसूर स्टेट रेलवे में Travelling Inspector of Accounts थे। उन्होंने महज़ 112 सदस्यों और ₹2,580 की पूंजी के साथ इसकी नींव रखी।

आज की स्थिति

आज बैंक के पास 10,000 से अधिक सदस्य हैं। जमा राशि ₹650 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। 5 शाखाओं के जरिए सेवाएं दी जा रही हैं – मैसूर (रेलवे वर्कशॉप, अशोकपुरम और शेषाद्रि अय्यर रोड), बेंगलुरु, येलहंका और अरसीकेरे।

उपलब्धियां और भविष्य

2007 में इसे मैसूर जिले का सर्वश्रेष्ठ सहकारी बैंक घोषित किया गया। 2009 में कोर बैंकिंग सिस्टम लागू हुआ। अब बैंक हुबली, मैंगलुरु, मांड्या और दावणगेरे में नई शाखाएं खोलने की तैयारी कर रहा है।

105वीं वर्षगांठ का जश्न

6 सितंबर को मैसूर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्लेटिनम जुबली ऑडिटोरियम में वर्षगांठ का भव्य आयोजन होगा। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार इसका उद्घाटन करेंगे।

समारोह के एक भाग के रूप में, बैंक के वरिष्ठ सदस्यों को सम्मानित किया जाएगा, तथा इसके सदस्यों के उन बच्चों को प्रतिभा पुरस्कार प्रदान किया जाएगा, जिन्होंने एसएसएलसी या उच्चतर परीक्षाओं में 80% से अधिक अंक प्राप्त किए हैं।

इस समारोह में बैंक के उपाध्यक्ष एस. आनंद, सीईओ नारायण और अन्य उपस्थित थे।

Diksha