Trending News

झारखंड JPSC परीक्षा मामले में CID की बड़ी कार्रवाई, रांची और लखनऊ से 5 गिरफ्तार, अब तक कुल 19 अरेस्ट हुए यूपी के प्रतापगढ़ में बारिश के दौरान गिरा जर्जर मकान, हादसे में 6 लोगों की मौत थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस नहीं होने पर अब नहीं मिलेगा पेट्रोल पीवी सिंधु को BWF वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में 9वीं रैंकिंग मिली आज वर्क फ्रॉम होम करें, भारी बारिश के चलते गुरुग्राम पुलिस ने जारी की एडवाइजरी झारखंड JPSC परीक्षा मामले में CID की बड़ी कार्रवाई, रांची और लखनऊ से 5 गिरफ्तार, अब तक कुल 19 अरेस्ट हुए यूपी के प्रतापगढ़ में बारिश के दौरान गिरा जर्जर मकान, हादसे में 6 लोगों की मौत थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस नहीं होने पर अब नहीं मिलेगा पेट्रोल पीवी सिंधु को BWF वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में 9वीं रैंकिंग मिली आज वर्क फ्रॉम होम करें, भारी बारिश के चलते गुरुग्राम पुलिस ने जारी की एडवाइजरी

ICAR और NDDB के बीच ऐतिहासिक समझौता

यह समझौता ज्ञापन जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता, कम उत्पादकता और मूल्य श्रृंखला विकास जैसी जटिल चुनौतियों से निपटने के लिए एक सुनियोजित साझेदारी का मार्ग प्रशस्त करेगा

Published: 12:24pm, 13 Jan 2026

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) ने संपूर्ण डेयरी क्षेत्र में बहुविषयक अनुसंधान, नवाचार और क्षमता निर्माण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह साझेदारी डेयरी उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन जैसे प्रमुख क्षेत्रों को कवर करेगी, जिसमें देशभर के लाखों डेयरी किसानों जैसे प्राथमिक हितधारकों को सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया गया है।

इस समझौता ज्ञापन पर ICAR के पशु विज्ञान  उप महानिदेशक डॉ. राघवेंद्र भट्टा और एनडीडीबी के कार्यकारी संचालन निदेशक  एस. रेगूपथी ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर भारत सरकार के कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव एवं ICAR के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट तथा एनडीडीबी के अध्यक्ष डॉ. मीनेश सी. शाह उपस्थित रहे।

ICAR के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट ने अपने संबोधन में संस्थागत बाधाओं को तोड़ते हुए पूरक अनुसंधान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने एकीकृत कृषि प्रणालियों की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यह समझौता ज्ञापन जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता, कम उत्पादकता और मूल्य श्रृंखला विकास जैसी जटिल चुनौतियों से निपटने के लिए एक सुनियोजित साझेदारी का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने आवारा पशुओं की समस्या के समाधान, खाद प्रबंधन और बायोगैस उपयोग के लिए टिकाऊ मॉडल विकसित करने हेतु गौशालाओं को अपनाने की सलाह दी तथा पशुधन उत्पादकता बढ़ाने में चारे की अहम भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ये सभी पहलें ICAR संस्थानों से विकसित हो रही नवीनतम तकनीकों और नवाचारों से संचालित होंगी।

NDDB के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने कहा कि यह साझेदारी ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना को साकार करने के लिए एकीकृत वैज्ञानिक सहयोग का एक सशक्त मंच तैयार करेगी। उन्होंने बताया कि NDDB पहले भी ICAR संस्थानों के साथ राशन संतुलन, खनिज मानचित्रण और मिश्रित राशन जैसी कई पहलों पर सफलतापूर्वक कार्य कर चुका है। उन्होंने पारंपरिक पशु चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला और पशुधन व कृषि क्षेत्रों में उभरती चुनौतियों का राष्ट्रीय हित में समाधान करने के लिए NDDB की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही उन्होंने देश के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में लागू किए जा सकने वाले अनुकरणीय मॉडल विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

इस समझौता ज्ञापन का मुख्य उद्देश्य ICAR की वैज्ञानिक एवं अनुसंधान विशेषज्ञता को NDDB के व्यापक जमीनी अनुभव और मजबूत संस्थागत क्षमताओं के साथ जोड़ना है, ताकि विशेष रूप से जमीनी स्तर पर डेयरी मूल्य श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियों का समाधान किया जा सके। यह सहयोग ज्ञान साझाकरण, प्रौद्योगिकी विकास एवं सत्यापन, मानव संसाधन विकास तथा शोधकर्ताओं, पेशेवरों और किसानों के लिए संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर केंद्रित रहेगा।

इस कार्यक्रम में ICAR और NDDB दोनों के वरिष्ठ अधिकारियों और विशिष्ट प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।

Diksha