सहकारिता मंत्रालय ने सहकारी बैंकिंग नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 की प्राथमिकताओं की समीक्षा की। केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्रियों कृष्ण पाल गुर्जर और मुरलीधर मोहोल की संयुक्त अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में सहकारी ऋण व्यवस्था की संस्थागत क्षमता और पहुंच बढ़ाने पर चर्चा हुई।
बैठक में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स), जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) और राज्य सहकारी बैंकों (एसटीसीबी) वाली त्रिस्तरीय सहकारी ऋण संरचना को सुदृढ़ करने पर ध्यान दिया गया। इस ढांचे को मजबूत बनाना सहकारी वित्तीय व्यवस्था की प्रभावशीलता और समावेशिता बढ़ाने की प्राथमिकता के रूप में सामने आया।
सहकारी बैंकों की शाखाओं का विस्तार करने, नए वित्तीय उत्पाद पेश करने और सरकारी कारोबार तक उनकी पहुंच बेहतर बनाने के विषयों पर भी विचार किया गया। इन पहलुओं पर चर्चा का उद्देश्य बैंकों की सेवाओं और परिचालन क्षमता को व्यापक बनाना रहा।
डिजिटल क्षमताओं तथा साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की जरूरत को भी प्रमुखता दी गई। समीक्षा में तकनीकी तैयारी को सहकारी बैंकिंग व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण का हिस्सा माना गया। इससे डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं पर भी ध्यान केंद्रित हुआ।
शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) की मजबूती के लिए राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त एवं विकास निगम (एनयूसीएफडीसी) की भूमिका पर विशेष चर्चा हुई। बैठक में निगम के माध्यम से इन बैंकों को सशक्त बनाने पर जोर रहा। समीक्षा में सहकारी बैंकों की संस्थागत क्षमता, तकनीकी दक्षता और पहुंच को बेहतर बनाकर ऋण व्यवस्था को अधिक मजबूत तथा समावेशी बनाने की प्राथमिकता रेखांकित हुई।


