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हरियाणा में प्राकृतिक खेती को मिलेगी नई दिशा, किसानों को मिलेंगे 20 हजार रुपए

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरुग्राम और हिसार में प्राकृतिक व जैविक मंडियों की स्थापना, 20,000 रुपये प्रति किसान ब्रांडिंग के लिए, और देसी गाय व ड्रम खरीद के लिए सब्सिडी की घोषणा की। पंचायती भूमि का 10% प्राकृतिक खेती के लिए आरक्षित होगा। 2025-26 तक एक लाख एकड़ भूमि को प्राकृतिक खेती के तहत लाने का लक्ष्य है।

Published: 09:00am, 11 Jun 2025

हरियाणा सरकार ने फसलों की लागत कम करने और गुणवत्ता युक्त उत्पाद सुनिश्चित करने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में आयोजित प्राकृतिक खेती सम्मेलन में कई घोषणाएं कीं। इन पहलों का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रोत्साहित करना और उनके उत्पादों को उचित बाजार उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्राकृतिक और जैविक खेती से उत्पादित गेहूं, धान, दालों, फलों, और सब्जियों के लिए गुरुग्राम और हिसार में प्राकृतिक व जैविक मंडियां स्थापित की जाएंगी। इन मंडियों के माध्यम से किसानों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर मूल्य प्राप्त होंगे। हरियाणा किसान कल्याण प्राधिकरण के तहत एक समिति का गठन किया जाएगा, जो इन उत्पादों का उचित मूल्य निर्धारण सुनिश्चित करेगी। साथ ही, प्राकृतिक खेती के उत्पादों की ब्रांडिंग और पैकेजिंग के लिए प्रति किसान 20,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई वित्तीय प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की हैं। प्रत्येक किसान को कच्चे माल के भंडारण और प्रसंस्करण के लिए चार ड्रम खरीदने हेतु 3,000 रुपये की सहायता दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, देसी गाय की खरीद के लिए 30,000 रुपये की सब्सिडी प्रदान की जाएगी। अब तक 492 देसी गायों की खरीद के लिए 1.23 करोड़ रुपये और 2,500 किसानों को ड्रम खरीद के लिए 75 लाख रुपये वितरित किए जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि खंड पूंडरी, जिला कैथल में कृषि विभाग की 53 एकड़ भूमि और प्रत्येक पंचायत में 10% पंचायती भूमि (न्यूनतम एक एकड़) प्राकृतिक खेती के लिए भूमिहीन किसानों को नीलामी के आधार पर पट्टे पर दी जाएगी। प्राकृतिक खेती की उपज की गुणवत्ता जांच के लिए निःशुल्क प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण केंद्र कुरुक्षेत्र, जींद, सिरसा, और करनाल में स्थापित किए गए हैं। 2022 से अब तक 720 किसान गोष्ठियां, 22 कार्यशालाएं, और एक राज्यस्तरीय मेला आयोजित हो चुके हैं, जिनमें 35,000 से अधिक किसानों ने भाग लिया। 2025-26 तक एक लाख एकड़ भूमि को प्राकृतिक खेती के तहत लाने का लक्ष्य है। प्राकृतिक खेती पोर्टल पर 1,84,665 किसानों ने 2,73,955 एकड़ क्षेत्र का पंजीकरण कराया है, जिसमें से 10,550 किसानों के 17,087 एकड़ का सत्यापन हो चुका है। सरकार ने 2022 से इस योजना के लिए 97 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिसे प्रतिवर्ष बढ़ाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने नागरिकों से अपील की कि वे प्राकृतिक खेती को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक सशक्तिकरण में योगदान दें, जिससे हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में सतत विकास को बढ़ावा मिले।

YuvaSahakar Desk