Trending News

यूपी में सरकारी भर्तियों के लिए नई नीति लागू, चरित्र सत्यापन पूरा होने से पहले भी मिल सकेगी प्रोविजनल नियुक्ति सहकारिता मंत्रालय ने राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (NCD) में सहकारी समितियों की सटीक लोकेशन दर्ज करने के लिए GPS आधारित NCD जियो टैग मोबाइल ऐप की पहल की NCUI द्वारा नई दिल्ली में AI कार्यशाला आयोजित, प्रतिभागियों को ChatGPT और सहकारिता क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग की जानकारी दी गई RBI ने महाराष्ट्र और कर्नाटक के दो सहकारी बैंकों पर लागू प्रतिबंधों को तीन महीने बढ़ाकर 30 जनवरी 2027 तक किया दिल्ली-NCR में मौसम ने ली करवट, कहीं बूंदाबांदी तो कहीं तेज बारिश, मौसम विभाग का येलो अलर्ट यूजीसी नेट दिसंबर 2026 के लिए 8.7 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन यूपी में सरकारी भर्तियों के लिए नई नीति लागू, चरित्र सत्यापन पूरा होने से पहले भी मिल सकेगी प्रोविजनल नियुक्ति सहकारिता मंत्रालय ने राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (NCD) में सहकारी समितियों की सटीक लोकेशन दर्ज करने के लिए GPS आधारित NCD जियो टैग मोबाइल ऐप की पहल की NCUI द्वारा नई दिल्ली में AI कार्यशाला आयोजित, प्रतिभागियों को ChatGPT और सहकारिता क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग की जानकारी दी गई RBI ने महाराष्ट्र और कर्नाटक के दो सहकारी बैंकों पर लागू प्रतिबंधों को तीन महीने बढ़ाकर 30 जनवरी 2027 तक किया दिल्ली-NCR में मौसम ने ली करवट, कहीं बूंदाबांदी तो कहीं तेज बारिश, मौसम विभाग का येलो अलर्ट यूजीसी नेट दिसंबर 2026 के लिए 8.7 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन

दालों में आत्मनिर्भर बनेगा भारत, 6 वर्षों में आएंगी 15 जीनोम-एडिटेड दालें

मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी दिशानिर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि इन नई किस्मों की ब्रीडिंग में उच्च उत्पादकता, कम समय में पकना, जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनशीलता, और कीट-प्रतिरोध की प्रमुख विशेषताएं होंगी। 2028-2029 के दौरान अरहर, उड़द और मसूर की 6 जीनोम-एडिटेड किस्में बाजार में उतारी जाएंगी, जबकि 2030-31 तक 9 और नई किस्में किसानों को उपलब्ध होंगी।

Published: 09:04am, 04 Nov 2025

केंद्र सरकार ने दालों की बढ़ती मांग और आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण योजना शुरू की है। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने “मिशन आत्मनिर्भरता इन पल्सेज़” के तहत अगले छह वर्षों में अरहर (तूर), उड़द और मसूर की 15 जीनोम-एडिटेड किस्में विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस मिशन की ऑपरेशनल गाइडलाइंस 18 अक्टूबर को जारी की गईं, जिनमें अनुसंधान, विकास और उत्पादन के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया है।

ज्यादा उत्पादन और जलवायु सहनशीलता होगी मिशन की प्राथमिकता

मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस मिशन का मुख्य उद्देश्य दालों की ऐसी किस्में तैयार करना है जो अधिक उपज देने वाली, कम अवधि में पकने वाली, और जलवायु परिवर्तन व कीट प्रकोप से निपटने में सक्षम हों। जीनोम एडिटिंग और हाइब्रिड तकनीक के संयोजन से इन किस्मों को विकसित किया जाएगा ताकि उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके।

निश्चित समयसीमा में जारी होंगी नई किस्में

कृषि मंत्रालय ने इन किस्मों को जारी करने के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की है। योजना के अनुसार,

  • 2028-2029 के दौरान अरहर, उड़द और मसूर की 6 जीनोम-एडिटेड किस्में (प्रत्येक की दो-दो) जारी की जाएंगी।

  • 2030-2031 में 9 नई किस्में (प्रत्येक की तीन-तीन) विकसित कर किसानों के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी।

इस कार्य के लिए आईसीएआर (ICAR) और उससे संबद्ध कृषि अनुसंधान संस्थानों को विशेष निधि और तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी।

दाल उत्पादन में 45% वृद्धि का लक्ष्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 11 अक्तूबर को लॉन्च किए गए इस मिशन पर सरकार ₹11,440 करोड़ का निवेश कर रही है। इसका उद्देश्य 2025-26 से 2030-31 के बीच देश में कुल दाल उत्पादन को 242 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 350 लाख मीट्रिक टन करना है। साथ ही, औसत उपज को 881 किलो प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 1130 किलो प्रति हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

क्लाइमेट रेज़िलिएंट खेती की दिशा में कदम

सरकार का यह मिशन न केवल आत्मनिर्भरता की ओर कदम है, बल्कि जलवायु परिवर्तन और कीटों से प्रभावित फसलों की चुनौतियों से निपटने के लिए भी दीर्घकालिक समाधान प्रस्तुत करता है। देश के प्रमुख दाल उत्पादक राज्यों में फील्ड ट्रायल्स के माध्यम से इन किस्मों को बड़े पैमाने पर अपनाने की योजना भी बनाई जा रही है।

YuvaSahakar Desk