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छत्तीसगढ़ में ‘गौधन योजना’ की शुरुआत, पशुधन सुरक्षा और ग्रामीण रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

गौधाम केवल सरकारी भूमि पर बनाए जाएंगे, जहां सुरक्षित बाड़बंदी, गोशाला, पानी और बिजली की सुविधा होगी। जिन क्षेत्रों में पहले से संरचना मौजूद है, वहां से लगे चरागाहों को हरे चारे की खेती के लिए आरक्षित किया जाएगा।

Published: 15:06pm, 12 Aug 2025

छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पशुधन सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए महत्वाकांक्षी ‘गौधन योजना’ लागू करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य न केवल आवारा और परित्यक्त मवेशियों की देखभाल करना है, बल्कि गांवों में जैविक खेती, चारा उत्पादन और गौ-आधारित उद्योगों के जरिए नए रोजगार अवसर सृजित करना भी है।

गोपालकों और पशुसेवकों को मानदेय

योजना के तहत गोपालकों को प्रतिमाह 10,916 रुपये और पशुसेवकों को 13,126 रुपये का मानदेय दिया जाएगा। साथ ही चारे के लिए दैनिक भत्ता भी निर्धारित किया गया है। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले गौधन को पहले वर्ष 10 रुपये, दूसरे वर्ष 20 रुपये, तीसरे वर्ष 30 रुपये और चौथे वर्ष 35 रुपये प्रतिदिन प्रति पशु भुगतान किया जाएगा।

सरकारी ज़मीन पर बनेंगे आधुनिक गौधाम

गौधाम केवल सरकारी भूमि पर बनाए जाएंगे, जहां सुरक्षित बाड़बंदी, गोशाला, पानी और बिजली की सुविधा होगी। जिन क्षेत्रों में पहले से संरचना मौजूद है, वहां से लगे चरागाहों को हरे चारे की खेती के लिए आरक्षित किया जाएगा।

संचालन के लिए कई संस्थाओं को मौका

यदि पंजीकृत गोशाला समिति संचालन से इनकार करती है, तो एनजीओ, ट्रस्ट, किसान उत्पादक कंपनियां या सहकारी समितियां संचालन के लिए आवेदन कर सकेंगी। इसकी अनुमति जिला समिति और छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग की सिफारिश पर दी जाएगी।

पहला चरण राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे

योजना के पहले चरण में राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में गौधाम स्थापित होंगे, जिससे रोजगार के नए अवसर खुलेंगे और बेसहारा पशुओं की समस्या का समाधान होगा।

प्रशिक्षण और उत्पाद निर्माण

हर गौधाम को प्रशिक्षण केंद्र बनाया जाएगा, जहां ग्रामीणों को गोबर और गौमूत्र से वर्मी कम्पोस्ट, कीटनाशक, गो वुड, गोनॉयल, दीपक, मंजन, अगरबत्ती आदि बनाने और बेचने का प्रशिक्षण मिलेगा।

पशु तस्करी पर रोक और चारा विकास

योजना से अवैध पशु तस्करी पर अंकुश लगेगा और बेसहारा पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। हरे चारे की खेती के लिए 47,000 रुपये प्रति एकड़ और पांच एकड़ पर 2,85,000  रुपये की सहायता राशि भी दी जाएगी।

Diksha

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