दुनिया के बेहतरीन स्ट्राइकर लियोनल मैसी की अगुआई में अपनी तेज तर्रार अग्रिम पंक्ति के दम पर मौजूदा और तीन बार की चैंपियन अर्जेंटीना विश्व कप फुटबॉल 2026 के फाइनल में यूरोपीय चैंपियन स्पेन के मजबूत किले को भेद कर खिताब बरकरार रखने के मकसद से उतरेगी। स्पेन के लिए दक्षिण अमेरिकी चैंपियन अर्जेंटीना के आक्रमण के ‘ब्रह्मास्त्र’ मैसी के प्रहार से रविवार को न्यूयॉर्क के न्यूजर्सी स्टेडियम में फाइनल में बचना बहुत मुश्किल होगा। अर्जेंटीना की टीम सातवीं बार और स्पेन की टीम दूसरी बार फाइनल में खेलेगी।
स्पेन ने फ्रांस के बेहतरीन नौजवान स्ट्राइकर कईलियान बापे को तो सेमीफाइनल में रोक जीत दर्ज की थी। अर्जेंटीना के मैसी को रोकना फाइनल में स्पेन के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होने वाला है क्योंकि वह वहां करीब डेढ़ दशक तक उसके खिलाफ खेलने से उसकी हर चाल और हर दांव से वाकिफ हैं। मैसी ने स्विटजरलैंड के लिए क्वॉर्टर फाइनल और इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में भले ही खुद गोल नहीं किए लेकिन अपनी टीम के आखिरी क्षणों में लाउटरो मार्टिनेज और एंजो फर्नांडेज द्वारा दागे गोल के सूत्रधार जरूर रहे। मैसी की ताकत है मौके पर ‘चौका‘ लगाना गोल करना या गोल के मौके बनाना। मैसी का यह छठा और आखिरी विश्व कप और इसमें अर्जेंटीना को चौथी बार चैंपियन बना कर अपना जूते टांगने की पुरजोर कोशिश करेंगे।
39 बरस के मैसी सही मायनों में बतौर फुटबॉलर अर्जेंटीना के ऐसे ड्राइवर हैं जो स्ट्राइकर के रूप में तेज रफ्तार से गाड़ी दौड़ाने के साथ छोटी और उबड़ -खाबड़ पगडंडी पर भी धैर्य से गाड़ी निकाल उसे अपनी मंजिल पर पहुंचना खूब जानते हैं। शतरंज की तरह फुटबॉल की भी रणनीति की बिसात बिछाने में माहिर अपने उस्ताद लुइस डे ला फ्युंटे के मार्गदर्शन में स्पेन की निगाहें अर्जेंटीना के स्ट्राइकर लियोनल मैसी, अलेक्सिज मैक एलिस्टर, लिजांड्रो मार्टिनेज, एंजो फर्नांडेज की फाइनल में मजबूत चौकसी कर 2010 के बाद दूसरी बार खिताब जीतने पर लगी हैं। स्पेन के मिडफील्डर पैड्री की कोशिश अपने नौजवान स्ट्राइकर लमाइन यमाल के लिए आगे गेंद बढ़ाने की बजाय मैसी, मैक एलिस्टर और लिजांड्रो मार्टिनेज के कब्जे से गेंद को दूर रखने की रहेगी।
दोनों टीमें विश्व कप फुटबॉल के इतिहास में केवल एक और आखिरी बार 1966 में जब ग्रुप चरण में भिड़ी थी और तब मिडफील्डर लुइस अर्टाइम के दो गोल से अर्जेंटीना ने स्पेन पर 2-1से जीत दर्ज की थी। पराजित स्पेन के लिए तब इकलौता गोल मिडफील्डर पिरी ने दागा था। अपने तीनों ग्रुप मैच आसानी से जीतने के बाद अर्जेंटीना के खासतौर पर नॉकआउट में अंतिम 32 में काबो वर्डे और स्विटजरलैंड के खिलाफ क्वॉर्टर फाइनल में अतिरिक्त समय में और मिस्र के खिलाफ अंतिम 16 और इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में 80 वें मिनट के बाद दो गोल कर जीत दर्ज कर दर्शाया कि उन्हें हारी बाजी पलट जीतना खूब आता है। ऐसे में मैसी सहित दुनिया के अपने सर्वश्रेष्ठ स्ट्राइकरों के बूते खतरनाक हमलों लिए ख्यात अर्जेंटीना के खिलाफ अब तक पूरे टूर्नामेंट में मात्र एक गोल खाने वाले स्पेन के गोलरक्षक उनई साइमन सहित उसकी रक्षापंक्ति आखिरी क्षण तक फाइनल में जरा सी भी ढील गवारा नहीं कर सकती है।
अर्जेंटीना का आखिरी क्षण तक हार न मानने का जज्बा और जीवट उसे स्पेन की रक्षापंक्ति के मजबूत चक्रव्यूह को फाइनल में तोड़ने का दावेदार बनाता है। अपने छठे विश्व कप में अब तक सबसे ज्यादा आठ गोल कर चुके स्ट्राइकर लियोनल मैसी इसके इतिहास में अब तक कुल सबसे ज्यादा 21 गोल करने वाले फुटबॉलर हैं। मैसी भले ही फाइनल तक सफर में दो पेनल्टी किक गोल करने से चूके हैं लेकिन इससे भी अहम अहम है कि पैरों का यह जादूगर इसके बाद दो मैदानी गोल कर अपनी टीम की जीत का हीरो बन गया।
दिलचस्प बात है कि अपनी जवानी में अर्जेंटीना के लियोनल मैसी कभी स्पेन की ला मासिया अकेडमी में फुटबॉल का ककहरा और इसकी बारिकियां उसी तरह सीख चुके है जिस तरह उसके आज के चमत्कारिक फुटबॉलर 19 बरस के लमाइन यमाल, डानी आल्मो और माइकल ओयरजबल ने अपने फुटबॉल कौशल को मांजा है। दिलचस्प बात यह है कि स्पेन के हमलों का दारोमदार जिन यमाल, आल्मो और ओयरजबल पर हैं वे सभी मैसी के पैरों की कलाकारी के मुरीद हैं। ओल्मो ने अपने कमरे में मैसी की फोटो तक लगा रखी है। स्पेन के ओयरजबल आज भी मैसी के विडियो देख खुद को उनका सा बेहतरीन फुटबॉलर बनाने की कोशिश करते हैं।
दिलचस्प यह होगा मैसी के फुटबॉल कौशल के मुरीद स्पेन फुटबॉल टीम के युवा तुर्क अपने आदर्श के खिलाफ विश्व कप जैसे फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर फाइनल के दबाव में किस तरह खेलते हैं। मैसी बरसों स्पेन के सबसे बड़े क्लब बार्सीलोना से खेले हैं। ऐसे में मैसी के जितने मुरीद उनके अपने अर्जेंटीना में लगभग उतने ही स्पेन में हैं। मैसी के पास अर्जेंटीना के साथ स्पेन की नागरिकता भले ही है लेकिन वह हैं खालिस अर्जेंटीनी। मैसी के पास तो एक समय स्पेन की ओर खेलने का प्रस्ताव था लेकिन तब करीब 15-16 बरस की उम्र में उनकी सोच साफ थी कि वह केवल और केवल अर्जेंटीना के लिए खेलेंगे और इस पर आज तक काबिज हैं। मैसी जब 20 बरस के थे तो उन्होंने एक विज्ञापन में तब छह महीने के रहे अब स्पेन के फाइनल में तुरुप के इक्के समझे जा रहे लमाइन यमाल को नहलाया था और यह विडियो आज सबसे ज्यादा वायरल है।
अर्जेंटीना की इस विश्व कप फुटबॉल में रविवार को स्पेन के खिलाफ खेलने उतरने वाली टीम के आधा दर्जन खिलाड़ी स्पेन में उसके अलग अलग क्लबों में उसकी टीमों में साथ खेलते हैं। विश्व कप के बाद बाद फिर वे स्पेनी क्लब के लिए साथ साथ खेलते दिखेंगे। यह कहने का मकसद है कि अर्जेंटीना और स्पेन के फुटबॉलर, दोनों एक दूसरे के फुटबॉल कौशल और ताकत और रणनीति से वाकिफ हैं। एक और दिलचस्प बात यह है की अर्जेंटीना टीम के मौजूदा कोच लियोनल स्कोलनी कभी अब स्पेन के कोच लुइस डे ला फ्युंटे के साथ सहायक कोच रह चुके हैं। ऐसे में स्कोलनी को स्पेन के कोच फ्युंटे की फुटबॉल के मैदान पर रणनीति की बिसात की बाबत बहुत कुछ मालूम है और वह इसी के मुताबिक अर्जेटीना के लिए फाइनल के लिए अपनी रणनीतिक बिसात बिछाएंगे।
बेशक स्पेन की कोशिश अपने छोटे छोटे पासों की बदौलत गेंद को अपने कब्जे और खासतौर पर अर्जेंटीना के स्टार स्ट्राइकर लियोनल मैसी को फाइनल में उसी तरह रोकने की होगी, जिस तरह उसने सेमीफाइनल में फ्रांस के कइलियान बापे को रोका था। यहीं बापे के जोश की बजाय मैसी का अनुभव फाइनल में उनके और उनकी अर्जेंटीनी टीम के बहुत काम आएगा। स्पेन के पास मौका मिलने पर जाकर गोल करने में सक्षम फुलबैक मार्क कुकरेला और पेड्रो पोरो हैं लेकिन बस इसी तरह उसकी पीछे उसकी रक्षापंक्ति में बनी दरार को भेदने अर्जेंटीना के मैसी , एंजो फर्नांडेज और मैक एलिस्टर खूब जानते हैं।
अर्जेंटीना की संभावित एकादश: इमिलियानो मार्टिनेज,नाहुइल, रोमेरो, लिजांड्रो मार्टिनेज, टैगलियाफियाको, मैक एलिस्टर, एंजो फर्नांडेज, गुईलियानो सिमियोन, लियोनल मैसी, जूलियन अल्वारेज।
स्पेन की संभावित एकादश: साइमन, पोरो, लापोर्टो, कुब्राजी, कुकरेला, रॉड्री, फैबियन, लमाइन यमाल, डानी आल्मो, अलेक्स बाइना, ओयरजबल।
स्पेन का फाइनल तक का सफर
ग्रुप एफ में स्पेन ने काबो वर्डे से 0-0 से ड्रॉ खेला। सउदी अरब को 4-0 से, उरुग्वे को 1-0 से हरा अंतिम 32 में पहुंचा। अंतिम 32 में उसने ऑस्ट्रिया को 3-0 से, प्री क्वॉर्टर फाइनल में पुर्तगाल को 1-0 से, क्वॉर्टर फाइनल में बेल्जियम को 2-1 से तथा सेमीफाइनल में फ्रांस को 2-0 से हराया।
अर्जेंटीना का फाइनल तक का सफर
ग्रुप जे मैच में अर्जेंटीना ने अल्जीरिया को 3-0 से, ऑस्ट्रिया को 2-0 से, जॉर्डन को 3-1 से हराया। अंतिम 32 में उसने केप वर्डे को 3-2 से, प्री क्वॉर्टर फाइनल में मिस्र को 3-2 से, स्विटजरलैंड को क्वॉर्टर फाइनल में 3-1 से और इंग्लैंड को सेमीफाइनल में 2-1 से हराया।
फाइनल बेहद खास और करीबी रहेगा : मैसी
अर्जेंटीना के लिए अपने करियर का लगातार तीसरा विश्व कप फुटबॉल खेलने जा रहे कप्तान लियोनल मैसी ने फाइनल से पहले कहा, ‘मैं स्पेन टीम और उसकी फुटबॉल शैली से वाकिफ हूं। स्पेन उत्कृष्ट फुटबॉलरों से सज्जित एक बेहतरीन टीम है। मैं स्पेन के खिलाड़ियों को भी जानता हूं। मैं स्पेन के कई खिलाड़ियों के खिलाफ पहले भी खेल चुका हूं और उनके खेल पर करीबी निगाह रखता हूं। स्पेन की मौजूदा टीम के कई खिलाड़ी उसी बार्सीलोना क्लब के लिए खेलते हैं, मैं जिसके काफी खेला हूं। यह विश्व कप फुटबॉल बेहद खास होगा और करीबी रहने वाला है। 2019 में कोपा अमेरिका के लिए लौटने के बाद से टीम के साथ मेरा अब तक अनुभव रहा इतना बेहतरीन रहा है जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। मैंने अर्जेंटीना की अपनी मौजूदा टीम के साथ ट्रॉफियां और कामयाबियां तो हासिल की ही इसके साथ हर पल क्षण का पूरा लुत्फ उठाया। टीम के साथ मिलकर प्रतिद्वंद्वी का मुकाबला करना वाकई यह सब एक बेहतरीन सफर रहा है।’
हमारी टीम मुश्किल में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करती है :स्कोलनी
अर्जेंटीना के कोच लियोनल स्कोलनी ने कहा, ‘हमारी टीम मुश्किल में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करती है। प्रतिद्वंद्वी टीम जब जरा झिझकती तो हम पूरी ताकत से हमला बोलते हैं। हमारी यह टीम मुझे बराबर चौंकाना बंद नहीं करती। हम फाइनल जीतने के लिए अपना सब कुछ झोंक देंगे बावजूद लोगों को यह समझाना मुश्किल है हमारी टीम के ये खिलाड़ी कितनी मेहनत कर रहे हैं।‘
खिलाड़ी मुश्किल को भी आसान बना देते हैं: फ्युंटे
स्पेन के कोच लुइस डे ला फ्युंटे ने कहा, ‘हमारी साफ सोच ने हमें यहां विश्व कप के फाइनल तक पहुंचाया है। हमारे खिलाड़ियों ने हर दिन, प्रतिबद्धता, एकजुटता और प्रतिभा दिखाई है। हमारे खिलाड़ी मुश्किल को आसान बना देते हैं।


