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तेजी से मजबूत हो रहा अल नीनो, 2027 हो सकता है सबसे गर्म वर्ष

अप्रैल में 2026 के सबसे गर्म वर्ष बनने की संभावना 19 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 35 प्रतिशत हो गई है

Published: 11:22am, 27 Jul 2026

लगातार दो वर्षों तक ला नीना के प्रभाव के बाद प्रशांत महासागर में अल नीनो अभूतपूर्व गति से विकसित हो रहा है। जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसकी मौजूदा रफ्तार जारी रही तो यह आधुनिक इतिहास का सबसे शक्तिशाली अल नीनो बन सकता है। कार्बन ब्रीफ की नई रिपोर्ट के अनुसार, इसके कारण 2026 और विशेष रूप से 2027 में वैश्विक तापमान के नए रिकॉर्ड बनने की संभावना काफी बढ़ गई है।

रिकॉर्ड गति से मजबूत हुआ अल नीनो

रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2026 में उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के Niño3.4 इंडेक्स ने 0.5 डिग्री सेल्सियस का स्तर पार कर आधिकारिक रूप से अल नीनो की शुरुआत दर्ज की। इसके बाद मई में यह 1 डिग्री सेल्सियस और जून में 1.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। जुलाई के शुरुआती सप्ताहों में यह 2 डिग्री सेल्सियस से ऊपर निकल गया, जिसे वैज्ञानिक “सुपर अल नीनो” की श्रेणी मानते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इतनी तेज गति से अल नीनो का विकसित होना पहले कभी दर्ज नहीं किया गया।

इतिहास का सबसे शक्तिशाली अल नीनो बनने की संभावना

यह अध्ययन दुनिया की 14 प्रमुख जलवायु पूर्वानुमान संस्थाओं द्वारा तैयार किए गए 667 मॉडल सिमुलेशन पर आधारित है। इनके अनुसार जुलाई से दिसंबर 2026 के बीच Niño3.4 क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 3.59 डिग्री सेल्सियस तक अधिक हो सकता है। इससे पहले 2015-16 का अल नीनो सबसे शक्तिशाली माना जाता था, जिसमें यह आंकड़ा लगभग 2.75 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था। रिपोर्ट के अनुसार, 91 प्रतिशत मॉडल संकेत दे रहे हैं कि 2026 का अल नीनो आधुनिक इतिहास का सबसे शक्तिशाली हो सकता है।

2026 और 2027 में बढ़ सकती है रिकॉर्ड गर्मी

अल नीनो के मजबूत होने का असर वैश्विक तापमान के अनुमानों पर भी दिखाई दे रहा है। अप्रैल में 2026 के सबसे गर्म वर्ष बनने की संभावना 19 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 35 प्रतिशत हो गई है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2026 का औसत वैश्विक तापमान औद्योगिक-पूर्व स्तर की तुलना में लगभग 1.51 डिग्री सेल्सियस अधिक रहेगा। हालांकि किसी एक वर्ष का 1.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचना पेरिस समझौते के लक्ष्य के उल्लंघन का संकेत नहीं माना जाता, क्योंकि यह लक्ष्य लगभग 20 वर्षों के औसत तापमान पर आधारित है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सुपर अल नीनो का सबसे बड़ा प्रभाव 2027 में दिखाई देगा, क्योंकि महासागर की अतिरिक्त ऊष्मा को वातावरण में फैलने में कुछ महीने लगते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2027 के मानव इतिहास का सबसे गर्म वर्ष बनने की संभावना 92 प्रतिशत है और उस वर्ष वैश्विक तापमान औद्योगिक-पूर्व स्तर से लगभग 1.71 डिग्री सेल्सियस अधिक हो सकता है।

भारत और दुनिया पर क्या होगा असर?

अल नीनो के प्रभाव से दुनिया के कई हिस्सों में भीषण गर्मी, सूखा, जंगलों में आग, भारी वर्षा और बाढ़ जैसी चरम मौसमी घटनाएं बढ़ सकती हैं। भारत में इसका संबंध आमतौर पर कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून से रहा है, हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) और मैडन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) जैसे अन्य मौसमीय कारकों पर भी निर्भर करेगा। कमजोर मानसून की स्थिति में कृषि उत्पादन, जल संसाधनों और खाद्य सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है।

जलवायु परिवर्तन बढ़ा रहा जोखिम

वैज्ञानिकों का कहना है कि मौजूदा अल नीनो ऐसे समय विकसित हो रहा है जब मानव गतिविधियों के कारण पृथ्वी पहले ही रिकॉर्ड स्तर तक गर्म हो चुकी है। इसी वजह से अब आने वाला हर शक्तिशाली अल नीनो पहले की तुलना में अधिक गर्मी और अधिक चरम मौसम की घटनाएं पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी और जलवायु अनुकूलन उपायों को तेज करना अब पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।

YuvaSahakar Desk