Trending News

 MP, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब समेत 9 राज्यों में बारिश का अलर्ट, हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में आज से बर्फबारी, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के कई इलाकों में भी हल्की बारिश की संभावना         PM मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता, भारत और फ्रांस मिलकर भारत करेंगे हेलिकॉप्टर का निर्माण, माउंट एवरेस्ट की चोटी तक भर सकेंगे उड़ान, इंडिया-फ्रांस इनोवेशन फोरम को संबोधित करते हुए बोले मैक्रों- लीडरशिप करने वाला देश बन गया है भारत, हम 'मेक इन इंडिया' के भरोसेमंद साथी         कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लॉन्च किया Bharat-VISTAAR पोर्टल, अब किसानों को फोन पर मिलेगी AI से तुरंत सलाह, 'डिजिटल कृषि विशेषज्ञ" की तरह कार्य करेगा Bharat-VISTAAR, खेती से जुड़ी हर जरूरी जानकारी तक होगी किसानों की पहुंच         JEE Main 2026 सेशन का 1 रिजल्ट जारी, श्रेयस मिश्रा बने टॉपर, गर्ल्स में अनुष्का अग्रवाल रहीं अव्वल, 12 स्टूडेंट्स ने हासिल किया 100 पर्सेंटाइल         जयपुर में खोला गया राजस्थान का पहला नैफेड बाजार, राज्य के सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक ने किया उद्घाटन, नैफेड के प्रबंध निदेशक रामप्रकाश चौधरी रहे उपस्थित, एक ही छत के नीचे मिलेंगे दालें, खाद्य तेल और अनाज सहित 100 से ज्यादा घरेलू उत्पाद       

सहकार से समृद्धि: अमित शाह की राज्यों के सहकारिता मंत्रियों के साथ की उच्च स्तरीय बैठक

अमित शाह ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने की प्रक्रिया में सहकारिता की भूमिका सर्वोच्च होगी। उन्होंने कहा कि यह अवधारणा केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं, अपितु 140 करोड़ नागरिकों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करने से जुड़ी है

Published: 16:12pm, 18 Feb 2026

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में गुजरात की राजधानी गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्रियों की उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य सहकारिता क्षेत्र को सुदृढ़ कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करना तथा वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में कार्ययोजना तैयार करना रहा।

बैठक में ‘सहकार से समृद्धि’ और ‘सहयोग से खुशहाली’ के दृष्टिकोण को मूर्त रूप देने के लिए विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। इस अवसर पर विभिन्न राज्यों की उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों और अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 पर आधारित एक विशेष रिपोर्ट का भी विमोचन किया गया।

265 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने गुजरात में 265.30 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का ई-उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनमें नर्मदा खंड उद्योग सहकारी मंडल का एथनॉल डिस्टिलरी संयंत्र, 30 मेगावाट क्षमता का विद्युत उत्पादन संयंत्र, जैविक पोटाश संयंत्र, दो आधुनिक भंडार गृह, अमूल का व्हे प्रोटीन कंसन्ट्रेट पाउडर प्लांट तथा एक कृषि उत्पाद बाजार समिति (APMC) शामिल हैं।

उद्घाटन सत्र में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, राज्य विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी तथा केंद्रीय सहकारिता राज्यमंत्री कृष्ण पाल गुर्जर सहित अन्य गणमान्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम स्थल पर राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (NDDB), अमूल, इफको और बनास डेरी सहित लगभग 20 प्रमुख सहकारी संगठनों की प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसमें नवीन उत्पादों और सेवाओं का प्रदर्शन किया गया।

विकसित भारत में सहकारिता की निर्णायक भूमिका

अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने की प्रक्रिया में सहकारिता की भूमिका निर्णायक होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘विकसित भारत’ केवल आर्थिक आंकड़ों की वृद्धि तक सीमित अवधारणा नहीं है, बल्कि 140 करोड़ नागरिकों को सम्मानजनक जीवन, स्थायी आय और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना इसका मूल उद्देश्य है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पिछले चार वर्षों में सहकारिता क्षेत्र को वैज्ञानिक और संगठित ढंग से मजबूत करने के प्रयास किए गए हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम अब जमीनी स्तर पर परिलक्षित हो रहे हैं। कृषि, ग्रामीण विकास और पशुपालन जैसे क्षेत्रों की प्रगति में सहकारिता की केंद्रीय भूमिका है।

अन्न भंडारण क्षमता बढ़ाने पर विशेष बल

बैठक का प्रमुख फोकस देश की अन्न भंडारण क्षमता को सुदृढ़ करना रहा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में भारत की भंडारण क्षमता को लगभग तीन गुना बढ़ाने की आवश्यकता है, जिसमें कम से कम दो गुना विस्तार सहकारिता क्षेत्र द्वारा किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह दायित्व केवल प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) तक सीमित न रहकर तहसील स्तर की डेयरियों, राज्य स्तरीय मार्केटिंग फेडरेशनों, जिला सहकारी बैंकों और सेल्स-पर्चेज यूनियनों तक विस्तारित होना चाहिए।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश का लगभग 70 प्रतिशत अनाज उत्तर भारत, विशेषकर पंजाब और हरियाणा से खरीदा जाता है। यदि खरीद, भंडारण और वितरण की प्रक्रिया को एकीकृत और समन्वित किया जाए तो परिवहन लागत में 30 से 40 प्रतिशत तक की बचत संभव है। इस दिशा में सर्वस्पर्शीय और सुव्यवस्थित भंडारण नेटवर्क स्थापित करने में सहकारिता क्षेत्र अग्रणी भूमिका निभा सकता है।

बंद चीनी मिलों के पुनरुद्धार की पहल

बैठक में निष्क्रिय पड़ी सहकारी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने पर भी चर्चा हुई। अमित शाह ने राज्यों से आग्रह किया कि वे ठोस नीति उपायों के माध्यम से इन मिलों को पुनः चालू करें। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर एक नई सहकारी संस्था गठित की गई है, जिसके माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर चीनी मिलों को मल्टी-प्रोडक्ट मॉडल से जोड़ा जाएगा।

इस मॉडल के अंतर्गत चीनी उत्पादन के साथ-साथ खाद, गैस और अन्य उत्पादों का निर्माण कर एक ही इकाई से 11 प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। इस पहल की विस्तृत कार्ययोजना शीघ्र अंतिम रूप में लाई जाएगी, जिसके लिए राज्यों को लचीली और प्रोत्साहनपरक नीतियां अपनानी होंगी।

सहकारी बैंकों को सशक्त बनाने की रणनीति

‘Cooperation Amongst Cooperatives’ की अवधारणा को रेखांकित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने सुझाव दिया कि सभी सहकारी संस्थाएं अपने बैंक खाते जिला सहकारी बैंकों में खोलें। केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में सहकारी बैंकों को नोडल एजेंसी बनाए जाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, वृद्धावस्था पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की राशि सहकारी बैंकों के माध्यम से वितरित किए जाने से इन बैंकों की वित्तीय सुदृढ़ता बढ़ेगी और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा।

असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सहकारी मॉडल

बैठक में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, जैसे बढ़ई, प्लंबर और इलेक्ट्रिशियन, को सहकारी ढांचे से जोड़ने पर भी विचार किया गया। यह प्रस्तावित किया गया कि इन श्रमिकों के लिए विशेष सहकारी मॉडल विकसित किया जाए, जिससे उन्हें सम्मानजनक पारिश्रमिक, सामाजिक सुरक्षा और संगठित कार्य वातावरण उपलब्ध हो सके। मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी वर्षों में देश की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी किसी न किसी रूप में सहकारिता से जुड़ सकती है।

नई राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं में राज्यों की भागीदारी

मंथन बैठक में नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट लिमिटेड, नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक लिमिटेड और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड जैसी राष्ट्रीय स्तर की नई सहकारी संस्थाओं में राज्यों की सक्रिय भागीदारी पर बल दिया गया। निर्यात, जैविक कृषि और गुणवत्तापूर्ण बीज आपूर्ति के क्षेत्र में सहकारिता को सशक्त बनाने की रणनीति साझा की गई।

इसके अतिरिक्त PACS और रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटीज (RCS) कार्यालयों के कंप्यूटरीकरण, राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस के उपयोग, मानव संसाधन विकास और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के विस्तार पर भी राज्यों के साथ विचार-विमर्श किया गया।

‘भारत टैक्सी’ जैसी पहलों का विस्तार

अमित शाह ने अपने संबोधन में ‘भारत टैक्सी’ जैसी सहकारी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल तेजी से विस्तार कर रही है और शीघ्र ही प्रत्येक नगर निगम क्षेत्र तक पहुंचेगी। तीन लाख से अधिक ड्राइवर इस मॉडल से जुड़ चुके हैं, जिससे सहकारिता के माध्यम से रोजगार सृजन और सम्मानजनक आजीविका सुनिश्चित हो रही है।

समापन में केंद्रीय मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सहकारिता क्षेत्र के समन्वित प्रयासों से भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में यह क्षेत्र प्रमुख भूमिका निभाएगा।

YuvaSahakar Desk

Recent Post