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खरीफ 2025 में भारत की उर्वरक सुरक्षा में सहकारी समितियों का योगदान; IFFCO, KRIBHCO अग्रणी

असम के नमरूप और ओडिशा के तालचेर में दो नई परियोजनाएँ निर्माणाधीन हैं, जिनकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 12.7 LMT प्रत्येक होगी

Published: 10:06am, 06 Nov 2025

समन्वय, दूरदृष्टि और सामूहिक प्रयास का अद्भुत उदाहरण पेश करते हुए भारत ने खरीफ 2025 सीजन के दौरान देशभर के किसानों के लिए यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की है।

उर्वरक विभाग ने समय पर योजना बनाते हुए और प्रमुख सहकारी संस्थाओं IFFCO तथा KRIBHCO के सहयोग से खादों की सुचारू आपूर्ति और वितरण सुनिश्चित किया। इस उपलब्धि ने देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को सशक्त आधार प्रदान किया है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार विभाग ने खरीफ 2025 के लिए कुल 230.53 लाख मीट्रिक टन (LMT) यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित की, जबकि अनुमानित मांग 185.39 LMT थी। यह उपलब्धता 193.20 LMT की कुल बिक्री से भी अधिक रही। पिछले वर्ष की तुलना में यूरिया की खपत लगभग 4.08 LMT अधिक दर्ज की गई, जो अनुकूल मानसून और सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला का संकेत है।

IFFCO और KRIBHCO भारत की सहकारी उर्वरक व्यवस्था के दो मजबूत स्तंभ इस सफलता के केंद्र में रहे।
IFFCO ने अपने संयंत्रों को लगभग पूर्ण क्षमता पर संचालित किया और राज्यों में समय पर स्टॉक की आवाजाही सुनिश्चित की। वहीं KRIBHCO ने उत्पादन और लॉजिस्टिक्स को बढ़ाते हुए क्षेत्रीय मांगों को पूरा किया और सरकार के आगामी रबी 2025–26 सीजन के लिए बफर स्टॉक निर्माण मिशन में सहयोग दिया।

सरकार की इस उपलब्धि के पीछे आयात में हुई उल्लेखनीय वृद्धि भी एक बड़ा कारण रही। अप्रैल से अक्टूबर 2025 के बीच भारत ने 58.62 LMT कृषि-ग्रेड यूरिया का आयात किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 24.76 LMT की तुलना में दोगुना से अधिक है। घरेलू उत्पादन औसतन 25 LMT प्रति माह रहा, जिससे 1 अक्टूबर को 48.64 LMT का स्टॉक बढ़कर अक्टूबर अंत तक 68.85 LMT हो गया।

जुलाई से अक्टूबर 2025 के बीच रिकॉर्ड रेक मूवमेंट दर्ज किया गया, जिससे उर्वरक विभाग भारतीय रेल और प्रमुख सहकारी संस्थाओं के बीच उत्कृष्ट तालमेल प्रदर्शित हुआ।

साथ ही  सरकार आत्मनिर्भरता की दिशा में घरेलू उत्पादन क्षमता को भी सुदृढ़ कर रही है। असम के नमरूप और ओडिशा के तालचेर में दो नई परियोजनाएँ निर्माणाधीन हैं, जिनकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 12.7 LMT प्रत्येक होगी। कई नई विस्तार परियोजनाएँ भी विचाराधीन हैं, जिससे आयात पर निर्भरता और घटेगी।

राज्य सरकारें कृषि विभाग के साथ मिलकर डिजिटल मॉनिटरिंग टूल्स का उपयोग कर पारदर्शी वितरण सुनिश्चित कर रही हैं, ताकि कालाबाजारी और डायवर्जन जैसी अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सके। जमीनी स्तर पर सहकारी समितियाँ इन सतर्कता उपायों में अहम भूमिका निभा रही हैं।

सरकार सहकारी संस्थाओं और किसानों के संयुक्त प्रयासों से खरीफ 2025 के लिए न केवल पर्याप्त यूरिया उपलब्ध हुआ है, बल्कि रबी 2025–26 के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार हुआ है। यह उपलब्धि भारत के सहकारी क्षेत्र की कृषि विकास और खाद्य सुरक्षा में अपरिहार्य भूमिका को पुनः स्थापित करती है।

Diksha