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सहकारिता क्षेत्र बना भारत की आर्थिक संरचना का अहम स्तंभ, कृषि, दुग्ध, चीनी और मत्स्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान

उर्वरक क्षेत्र में भी सहकारिता की मजबूत उपस्थिति देखी गई। वर्ष 2016-17 में 35% उर्वरकों का वितरण सहकारी संस्थाओं द्वारा किया गया, 28.8% कुल उत्पादन में और 25.6% स्थापित उत्पादन क्षमता (एन न्यूट्रिएंट) में सहकारी क्षेत्र की भागीदारी रही। पी न्यूट्रिएंट की स्थापित क्षमता में इनकी हिस्सेदारी 23.53% थी।

Published: 13:01pm, 07 Aug 2025

भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में सहकारी क्षेत्र के समग्र योगदान को मापने के लिए कोई अलग तंत्र उपलब्ध नहीं है, फिर भी नेशनल कोऑपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया (NCUI) और सरकारी आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि सहकारी संस्थाएं भारत की अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में अहम भूमिका निभा रही हैं।

लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने जानकारी दी कि सहकारी क्षेत्र के राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय GDP में योगदान को लेकर अलग से कोई डाटाबेस मौजूद नहीं है। हालांकि, एनसीयूआई द्वारा प्रकाशित ‘भारतीय सहकारी आंदोलन का सांख्यिकीय प्रोफाइल-2018’ रिपोर्ट में इस क्षेत्र की व्यापक भूमिका की झलक मिलती है।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2016-17 में कुल कृषि ऋण वितरण का 13.4% हिस्सा सहकारी बैंकों के माध्यम से वितरित किया गया। छोटे और सीमांत किसानों को दिए गए अल्पकालिक कृषि ऋण में इन संस्थाओं की हिस्सेदारी 19.13% रही। इसके अलावा, जारी किए गए कुल किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) में से 50.2% सहकारी संस्थाओं के माध्यम से दिए गए, और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को शामिल करने पर यह आंकड़ा 67.3% तक पहुंच गया।

उर्वरक क्षेत्र में भी सहकारिता की मजबूत उपस्थिति देखी गई। वर्ष 2016-17 में 35% उर्वरकों का वितरण सहकारी संस्थाओं द्वारा किया गया, 28.8% कुल उत्पादन में और 25.6% स्थापित उत्पादन क्षमता (एन न्यूट्रिएंट) में सहकारी क्षेत्र की भागीदारी रही। पी न्यूट्रिएंट की स्थापित क्षमता में इनकी हिस्सेदारी 23.53% थी।

चीनी उद्योग में, सहकारी संस्थाओं के पास 38.63% चीनी मिलें थीं, जिन्होंने कुल उत्पादन का 30.6% योगदान दिया। इनकी क्षमता उपयोग दर 46.14% रही, जो इनके प्रभावी संचालन को दर्शाता है।

दुग्ध क्षेत्र में सहकारी समितियों ने 84.17% तरल दूध का विपणन किया। कुल दूध उत्पादन का 9.5% इन समितियों द्वारा खरीदा गया, जो विपणन योग्य दूध के संदर्भ में 17.5% तक पहुंच गया।

भंडारण के क्षेत्र में भी सहकारिता की बड़ी भूमिका है। गांव स्तर पर भंडारण सुविधा वाले प्राइमरी एग्रीकल्चरल क्रेडिट सोसायटीज (PACS) की हिस्सेदारी 55.5% रही। कुल भंडारण क्षमता में सहकारी क्षेत्र का हिस्सा 22.77 मिलियन मीट्रिक टन था, जो राष्ट्रीय क्षमता का 14.79% है।

मत्स्य क्षेत्र में 20.05% सक्रिय मछुआरे सहकारी नेटवर्क का हिस्सा हैं। गेहूं और धान की खरीद में इनकी भागीदारी क्रमशः 13.3% और 20.4% रही।

रिटेल फेयर प्राइस शॉप्स में 20.3% दुकानें सहकारी क्षेत्र द्वारा संचालित थीं। वस्त्र उद्योग में इनकी हिस्सेदारी कुल कताई क्षमता में 29.34% तक थी।

रोज़गार सृजन में भी सहकारिता क्षेत्र का अहम योगदान है। यह क्षेत्र देश में 13.3% प्रत्यक्ष रोज़गार और 10.91% स्वरोज़गार के अवसर उपलब्ध कराता है।

साथ ही, अमित शाह ने बताया कि सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) के तहत निधियों की निगरानी और समय पर वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है। सरकार ने सभी केंद्रीय योजनाओं के कार्यान्वयन एजेंसियों को PFMS पर पंजीकरण कर ‘EAT’ मॉड्यूल का उपयोग अनिवार्य किया है।

Diksha