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सूर्य कुमार यादव बेहतरीन लीडर हैं : गंभीर

भारतीय क्रिकेट टीम ने सूर्य कुमार यादव की कप्तानी और गौतम गंभीर के मार्गदर्शन में न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर तीसरी बार टी20 विश्व कप का खिताब जीत लिया है। इस ऐतिहासिक जीत के बाद चीफ कोच गौतम गंभीर ने व्यक्तिगत रिकॉर्ड्स के बजाय 'ट्रॉफी कल्चर' और 'बेखौफ क्रिकेट' पर जोर दिया। गंभीर ने इस सफलता का श्रेय खिलाड़ियों की नि:स्वार्थ भावना को देते हुए खिताब राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण और चयनकर्ता अजीत आगरकर को समर्पित किया। साथ

Published: 17:45pm, 09 Mar 2026

नई दिल्ली, 8 मार्च, 2026: सूर्य कुमार यादव की अगुआई में भारत ने न्यूजीलैंड पर अहमदाबाद के नरेन्द्र मोदी स्टेडियम में रविवार रात दसवें आईसीसी टी20 क्रिकेट विश्व कप के फाइनल में 96 रन से जीत के साथ खिताब बरकरार रख इतिहास दोहराने के साथ इतिहास को हरा दिया। भारतीय टीम अपने घर में खिताब जीतने व लगातार दूसरी और कुल तीसरी बार टी20 विश्व कप खिताब जीतने वाली इतिहास की पहली टीम बन गई। गौतम गंभीर बतौर क्रिकेटर और चीफ कोच टी20 क्रिकेट विश्व कप जीतने वाले पहले भारतीय बन गए।

चीफ कोच गंभीर और कप्तान सूर्य कुमार के पहली से आखिरी गेंद तक ‘दे दनादन’ करने तथा टीम के लिए हर खिलाड़ी के नि:स्वार्थ होकर सर्वश्रेष्ठ देने के दर्शन से भारत ने कुल तीसरी बार क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट का विश्व कप जीता। भारत की इस जीत में चीफ कोच गंभीर और कप्तान सूर्य के टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किए गए लगातार तीन अर्द्धशतकों सहित 321 रन बनाने वाले सलामी बल्लेबाज संजू सैमसन, अचानक अपनी लय खोने के बाद फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ बेहतरीन अर्द्धशतक जड़ने वाले आईसीसी रैंकिंग में दुनिया के नंबर एक बल्लेबाज अभिषेक शर्मा और दुनिया के नंबर एक गेंदबाज मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती पर कायम भरोसे ने अहम भूमिका निभाई।

सूर्य कुमार यादव (2026) अब महेंद्र सिंह धोनी (2007) और रोहित शर्मा (2024) के बाद भारत को टी20 क्रिकेट विश्व कप खिताब जिताने वाले तीसरे कप्तान बन गए। भारत ने रविवार को 86 हजार क्रिकेट प्रेमियों की मौजूदगी में टी20 विश्व कप खिताब जीतने के साथ 2023 में ऑस्ट्रेलिया के हाथों अहमदाबाद में वनडे विश्व कप फाइनल में छह विकेट से हार की कसक भी मिटा दी। भारत इससे पहले टी20 विश्व कपों में न्यूजीलैंड से तीन बार हार चुका था। भारत ने रविवार को न्यूजीलैंड के खिलाफ हार के सिलसिले को फाइनल में तोड़ उसके खिलाफ पहली जीत के साथ तीसरी बार खिताब जीत नया इतिहास रच दिया।

रिंकू सिंह के टूर्नामेंट के बीच अपने पिता खान चंद को खोने के बाद जिस तरह टीम इंडिया का हर साथी खिलाड़ी, चीफ कोच गंभीर व कप्तान सूर्य दुख की इस घड़ी में उन्हें संबल दे उनके साथ खड़ा रहा, भारतीय टीम की इस खिताबी जीत में उसकी एकजुटता ने अहम भूमिका निभाई। मैदान पर जिस भी खिलाड़ी को खेलने का मौका मिला उसने तो बेहतरीन प्रदर्शन किया ही, एकादश से बाहर रहने पर उपकप्तान अक्षर पटेल, मोहम्मद सिराज, वाशिंगटन सुंदर, रिंकू सिंह और लेग स्पिनर कुलदीप यादव भी टीम इंडिया की जीत की खुशी सभी के साथ बांटते दिखे।

फाइनल में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी की दावत पाकर भारत ने निर्धारित 20 ओवर में 5 विकेट पर 255 रन बनाए। सलामी बल्लेबाज संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा व इशान किशन के तूफानी अर्द्धशतकों ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई। इसके बाद अनुभवी तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह (4/15) व उपकप्तान अक्षर पटेल (3/27) की धारदार गेंदबाजी की बदौलत न्यूजीलैंड को 19 ओवर में 159 रन पर समेट दिया। न्यूजीलैंड की ओर से टिम सीफर्ट (52), डैरल मिचेल (17) और कप्तान मिचेल सेंटनर (43) की कोशिशें नाकाम रहीं।

भारत के चीफ कोच गौतम गंभीर ने साफ-साफ कहा कि निजी उपलब्धियों का दौर अब खत्म हो चुका है। गंभीर ने कहा, ‘जब तक मैं चीफ कोच हूं, हम उपलब्धियों की बाबत चर्चा नहीं करेंगे। आप आसानी से यह देख भी सकते हैं। आप भारत के लिए फाइनल सहित पिछले तीनों मैचों को देख सकते हैं और इनमें संजू सैमसन ने अविजित 97, 89 और 89 रन की पारियां खेल कर बताया कि वह निजी उपलब्धियों के लिए नहीं खेले। आप जरा कल्पना करें कि भारतीय बल्लेबाज यदि उपलब्धियों के लिए खेल रहे होते तो हम संभवतः 250 रन तक नहीं पहुंच पाते। मीडिया को भी यह बात समझनी होगी। भारतीय क्रिकेट में निजी उपलब्धियों की चर्चा अब तक ज्यादा होती रही है। मेरा कहना है उपलब्धियों का जश्न मनाना बंद करो, ट्रॉफियों को जीतने का जश्न मनाओ। यही अहम रहेगा क्योंकि टीम का बड़ा मकसद ट्रॉफी जीतना होता है। मेरे लिए किसी खिलाड़ी का खुद के लिए रन बनाना मायने नहीं रखता और न ही कभी रखेगा।’

गंभीर ने आगे कहा, ‘मैं बहुत खुशकिस्मत हूं कि इस बाबत हमारे कप्तान सूर्य कुमार यादव और मेरी सोच एक सी है। कप्तान सूर्य कुमार यादव ने टी20 क्रिकेट में मेरा काम बहुत आसान कर दिया। सूर्य कुमार यादव बेहतरीन लीडर हैं। सूर्य को लीडर इसलिए कह रहा हूं क्योंकि वह ड्रेसिंग रूम और मैदान पर कप्तान से बड़ी शख्सियत होते हैं। सूर्य खुद को कप्तान की बजाय लीडर कहलाना पसंद करते हैं।’

सेमीफाइनल में संजू 88 और फाइनल में 89 रन बनाने के बाद छक्का जड़ने की कोशिश में आउट होकर शतक जड़ने से चूक गए, लेकिन उन्होंने कहा वह अपनी इस सोच से संतुष्ट थे। गंभीर ने कहा, ‘इस टी20 विश्व कप को जीतने का राज इसी में छिपा था कि जब कोई बल्लेबाज 100 रन के करीब हो तो वह तब एक-एक रन लेता या बाउंड्री जड़ता है। यदि कोई बल्लेबाज 94 रन पर खेल रहा है तो उसमें अगली गेंद पर छक्का जड़ने का जिगरा होना चाहिए बजाए इसके कि वह अपना शतक पूरा करने के लिए तीन या चार गेंद खेले। बतौर बल्लेबाज आप 96 रन से 100 तक जाने में चार गेंद खेलते हैं तो आप अपनी टीम को 20 रन पीछे कर देते हैं। यही 10-20 रन ही टी20 विश्व कप में जीत और हार में अहम हो जाते हैं। आप यदि 96 रन के स्कोर पर बड़ा स्ट्रोक खेलने की कोशिश में आउट भी हो जाते हैं तो कोई बात नहीं। हमारी टीम की सोच यही है कि आपकी 96 रन की पारी को उतना ही सराहा जाएगा।’

गंभीर ने कहा कि ऐसा तभी मुमकिन है जब आप टीम को खुद से पहले रखते हैं। उन्होंने कहा, ‘यह सिर्फ एक टीम को विरासत में पाना नहीं है, बल्कि अपनी खुद की एक नई टीम बनाना भी है। मैं बतौर कोच हमेशा से यही करना चाहता था कि क्या हम बिल्कुल अलग शैली से क्रिकेट खेल सकते हैं। यह टीम बेखौफ खिलाड़ियों का एक समूह है जो क्रिकेट का मैच हारने से नहीं डरता है।’

गौतम गंभीर ने इस ऐतिहासिक जीत को अपने पूर्ववर्तियों को समर्पित किया। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि मुझे यह ट्रॉफी राहुल (द्रविड़) भाई और फिर लक्ष्मण को समर्पित करनी चाहिए। राहुल भाई ने भारतीय क्रिकेट को इतनी बढ़िया स्थिति में बनाए रखने के लिए जो कुछ भी किया है, उसके लिए मैं उनका आभार जताना चाहता हूं। वीवीएस लक्ष्मण ने पर्दे के पीछे खासतौर पर नि:स्वार्थ भारतीय क्रिकेट और ‘सेंटर ऑफ एक्सिलेंस’ (COE) के लिए जो योगदान किया, उसके लिए उनका भी धन्यवाद। तीसरे मुख्य चयनकर्ता अजित आगरकर का भी आभार जताना चाहूंगा जिन्होंने ईमानदारी से अपना काम करने के लिए बहुत आलोचना झेली।’

गंभीर ने आईसीसी अध्यक्ष जय शाह की भूमिका को भी अहम बताया। उन्होंने याद किया, ‘जब मुझे चीफ कोच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी तो मेरे पास किसी फ्रेंचाइजी के चीफ कोच के रूप में कोई अनुभव नहीं था, लेकिन जय भाई ने मुझ पर भरोसा किया। जब मैं न्यूजीलैंड सीरीज और फिर दक्षिण अफ्रीका सीरीज के बाद खासे मुश्किल दौर से गुजर रहा था, तब जिस एक व्यक्ति ने मुझे फोन किया वह जय भाई ही थे। मैं बतौर कोच मुझ पर भरोसा बनाए रखने के लिए उनका धन्यवाद देना चाहूंगा। मेरा मानना है कि जब तक ये लोग हैं भारतीय क्रिकेट सुरक्षित हाथों में है।’

अंत में गंभीर ने टीम की रणनीति स्पष्ट करते हुए कहा, ‘यदि बड़ी कामयाबी पानी है तो टीम को बेखौफ क्रिकेट खेलनी होगी। टी20 फॉर्मेट में सबसे अहम बात यह है कि हम हारने से डरते नहीं हैं। मेरा हमेशा मानना है कि टी20 क्रिकेट में ‘जितना बड़ा जोखिम, उतना बड़ा इनाम’ सबसे अहम है। हम लंबे समय तक 160-170 रन वाली क्रिकेट अब नहीं खेलना चाहते हैं। दक्षिण अफ्रीका से हम 76 रन से हारे थे, लेकिन बावजूद इसके हमारी सोच कभी नहीं बदली। हमने कभी नहीं सोचा कि हमें थोड़ा संभलकर खेलना चाहिए। कप्तान खुद बड़ा जोखिम वाला क्रिकेट खेलना चाहते हैं, इसीलिए इसका श्रेय उन्हें भी दिया जाना चाहिए।’

YuvaSahakar Desk