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बिहार में 9वीं से तय होगी करियर की दिशा, छात्रों के लिए शुरू होंगी स्पेशल क्लास

बिहार के सरकारी स्कूलों में अब नौवीं कक्षा से ही विद्यार्थियों को उनके करियर के अनुसार विशेष मार्गदर्शन और पढ़ाई की सुविधा मिलने जा रही है। नई व्यवस्था के तहत छात्रों को स्पेशल क्लास में शामिल किया जाएगा, जहां वे अपनी रुचि और भविष्य के लक्ष्य के अनुसार विषयों का चयन कर सकेंगे।

Published: 12:41pm, 23 Jun 2026

बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी है। राज्य सरकार अब नौवीं कक्षा से ही विद्यार्थियों को उनके करियर के अनुसार विशेष मार्गदर्शन और पढ़ाई की सुविधा देने जा रही है। नई व्यवस्था के तहत छात्रों को स्पेशल क्लास में शामिल किया जाएगा, जहां वे अपनी रुचि और भविष्य के लक्ष्य के अनुसार विषयों का चयन कर सकेंगे।

सरकार की योजना है कि यदि कोई छात्र डॉक्टर बनना चाहता है तो उसे विज्ञान और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं से जुड़े विषयों की विशेष तैयारी कराई जाएगी। वहीं, इंजीनियरिंग में रुचि रखने वाले छात्रों को गणित, विज्ञान और तकनीकी विषयों पर अतिरिक्त प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को शुरुआती स्तर पर ही सही दिशा देना और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करना है।

शिक्षा विभाग का मानना है कि नौवीं कक्षा से करियर उन्मुख शिक्षा शुरू होने से विद्यार्थियों की रुचि के अनुसार उनकी क्षमता का विकास होगा। साथ ही उन्हें भविष्य की पढ़ाई और करियर चुनने में आसानी होगी। यह योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के उद्देश्यों के अनुरूप छात्रों को कौशल आधारित और लक्ष्य केंद्रित शिक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

सरकार की इस पहल से सरकारी स्कूलों के छात्रों को भी बेहतर करियर मार्गदर्शन और प्रतिस्पर्धी माहौल मिलने की उम्मीद है।

विद्यार्थियों को मिलेगा बेहतर शैक्षणिक माहौल, नई व्यवस्था लागू

बिहार सरकार ने राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नई शिक्षक निर्धारण व्यवस्था लागू कर दी है। शिक्षा विभाग ने कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति का नया मानक तय किया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देना और विद्यार्थियों को सभी विषयों के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराना है।

प्रारंभिक विद्यालयों

प्राथमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी निर्देश के अनुसार अब कक्षा 6 से 8 तक विज्ञान एवं गणित, सामाजिक अध्ययन और भाषा विषयों के लिए अलग-अलग शिक्षक उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही प्रत्येक कक्षा के लिए कम से कम एक शिक्षक की अनिवार्यता भी तय की गई है। यह व्यवस्था शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई), 2009 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 के प्रावधानों के अनुरूप लागू की गई है।

प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर ने सभी जिला पदाधिकारियों और जिला शिक्षा पदाधिकारियों को नए मानकों के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित कर शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जाए।

शिक्षा विभाग के सचिव ने भी इस नए शिक्षक निर्धारण मानक को मंजूरी दे दी है। अब राज्य के सभी प्रारंभिक विद्यालयों में कक्षा 1 से 5 और कक्षा 6 से 8 के लिए अलग-अलग शिक्षक आवश्यकता का आकलन किया जाएगा। विभाग का मानना है कि इस कदम से छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होगी।

YuvaSahakar Team