राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के लक्ष्यों को धरातल पर उतारते हुए भारत सरकार (Government Of India) के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL) के सचिव संजय कुमार ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CwSN) के लिए ‘करियर कार्ड’ लॉन्च किए हैं। नई दिल्ली (New Delhi) के कर्तव्य भवन-2 में आयोजित एक गरिमामय समारोह में इन कार्ड्स का अनावरण किया गया। यह पहल देश भर के सभी शिक्षार्थियों के लिए करियर मार्गदर्शन संसाधनों तक न्यायसंगत पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
NEP 2020 और समावेशी मार्गदर्शन
इस अवसर पर बोलते हुए संजय कुमार ने जोर देकर कहा कि यह पहल NEP 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF-SE) 2023 की भावनाओं के अनुरूप है। उन्होंने बताया कि शिक्षा मंत्रालय का विजन है कि जैसे-जैसे भारत एक ज्ञान-आधारित और समावेशी समाज की ओर बढ़ रहा है, सभी शिक्षार्थियों, विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों को भी सशक्त बनाया जाना चाहिए ताकि वे ‘विकसित भारत’ की यात्रा में सार्थक योगदान दे सकें।
प्रमुख सहयोग और तकनीकी भागीदारी
ये करियर कार्ड केवल सरकारी प्रयास नहीं हैं, बल्कि एक व्यापक तकनीकी सहयोग का परिणाम हैं। इन्हें यूनिसेफ (UNICEF) इंडिया, NCERT (सीआईईटी और पीएसएससीआईवीई सहित), प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) के तहत आने वाले राष्ट्रीय संस्थानों के साथ मिलकर विकसित किया गया है। क्षेत्र के विशेषज्ञों के इनपुट ने इन कार्ड्स को छात्रों के लिए अत्यधिक उपयोगी और सरल बनाया है।
करियर कार्ड की विशेषताएँ
करियर कार्ड्स को छात्रों को भविष्य के बारे में सूचित निर्णय लेने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
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व्यापक जानकारी: प्रत्येक कार्ड में भूमिकाओं, जिम्मेदारियों, आवश्यक योग्यताओं और संभावित करियर पथों की संक्षिप्त जानकारी दी गई है।
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समावेशी प्रारूप: कुल 500 करियर कार्ड्स में से 150 कार्डों को विशेष रूप से CwSN के लिए अनुकूलित किया गया है।
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ब्रेल फॉर्मेट: दृष्टिबाधित छात्रों की सहायता के लिए ये कार्ड अब ब्रेल लिपि (Braille) में भी उपलब्ध कराए गए हैं।
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उपयोग: ये कार्ड शिक्षकों और परामर्शदाताओं के लिए एक मूल्यवान संसाधन के रूप में काम करेंगे ताकि वे छात्रों की रुचियों और आकांक्षाओं के अनुसार उन्हें प्रभावी ढंग से दिशा दिखा सकें।
कौशल और शिक्षक प्रशिक्षण पर बल
सचिव ने इस बात को रेखांकित किया कि 2030 तक कक्षा 12वीं पूरी करने वाले प्रत्येक छात्र के पास कम से कम एक मुख्य कौशल (Skill) होना चाहिए। उन्होंने CwSN की जल्दी पहचान, परीक्षण और स्कूल प्रणाली के भीतर फ्लैगिंग की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसके अतिरिक्त, NCERT द्वारा शिक्षकों के लिए एक समर्पित प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किया जाएगा ताकि वे समावेशी शिक्षा को बेहतर ढंग से लागू कर सकें। NIOS ने भी विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए संस्थानों के साथ संबद्धता के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
भविष्य का रोडमैप
संयुक्त सचिव प्राची पांडे ने बताया कि 2024 में ‘अखिल भारतीय शिक्षा समागम’ के दौरान 500 कार्ड वाली करियर गाइडेंस बुक जारी की गई थी। अब इसे विशेष रूप से दिव्यांग छात्रों के लिए विस्तारित किया गया है। शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि 2047 तक भारत के रूपांतरण में शिक्षा ही सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, और समावेशिता इस बदलाव की मुख्य पहचान होगी।


