प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में पेपर लीक के खिलाफ कानून को और सख्त बनाने से जुड़े संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसका उद्देश्य प्रतियोगी और सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना तथा संगठित पेपर लीक गिरोहों पर तेज और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
प्रस्तावित प्रावधानों के तहत पेपर लीक के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों को कानूनी आधार दिया जाएगा। इन अदालतों को तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला देने का लक्ष्य सौंपे जाने की बात कही गई है। इससे लंबे समय तक लंबित रहने वाले मामलों का शीघ्र निपटारा होगा और दोषियों को समयबद्ध सजा मिल सकेगी।
संशोधन में पेपर लीक के संगठित अपराध में शामिल माफिया, सेवा प्रदाताओं और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अधिकतम 10 वर्ष की कैद तथा 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है। मौजूदा लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में संगठित अपराध के लिए पांच से 10 वर्ष की सजा और कम-से-कम एक करोड़ रुपये के जुर्माने की व्यवस्था है।
प्रधानमंत्री ने कहा है कि युवाओं का हित और उनका भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार का मानना है कि कठोर दंड, विशेष अदालतों और समयबद्ध सुनवाई से परीक्षा माफिया पर अंकुश लगेगा, छात्रों का भरोसा बढ़ेगा और मेहनत तथा योग्यता के आधार पर निष्पक्ष चयन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
यह कदम परीक्षा रद्द होने से होने वाली परेशानी, आर्थिक नुकसान और अभ्यर्थियों के मानसिक दबाव को कम कर सकता है। पेपर लीक के खिलाफ कानून को और सख्त बनाने से जुड़े संशोधन प्रस्ताव 27 जुलाई को सदन में आ सकता है।


