केंद्र सरकार ने परमाणु विज्ञान, परमाणु ऊर्जा और विकिरण सुरक्षा के क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करने के लिए प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत किया है। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, ग्लोबल सेंटर फॉर न्यूक्लियर एनर्जी पार्टनरशिप और न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के विभिन्न केंद्रों पर वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, सुपरवाइजरों और तकनीशियनों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
केंद्रीय परमाणु ऊर्जा राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में बताया कि मुंबई स्थित बीएआरसी ट्रेनिंग स्कूल में हर वर्ष 230 प्रशिक्षुओं को परमाणु रिएक्टरों के डिजाइन, विकास, संचालन, रखरखाव और उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान का प्रशिक्षण देने की क्षमता है। हैदराबाद स्थित एटॉमिक मिनरल्स डायरेक्टोरेट प्रशिक्षण केंद्र में यूरेनियम और अन्य परमाणु खनिजों की खोज से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं।
बहादुरगढ़ स्थित ग्लोबल सेंटर फॉर न्यूक्लियर एनर्जी पार्टनरशिप में परमाणु सुरक्षा, विकिरण सुरक्षा, परमाणु सामग्री विश्लेषण, थोरियम ईंधन चक्र और रेडियोआइसोटोप के उपयोग से जुड़े पांच विशेष स्कूल संचालित हैं। प्रत्येक स्कूल में 20 से 45 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण देने की क्षमता है।
एनपीसीआईएल के सात न्यूक्लियर ट्रेनिंग सेंटर रावतभाटा, तारापुर, नरौरा, कैगा, काकरापार, कलपक्कम और कुडनकुलम में स्थित हैं। यहां इंजीनियरों के लिए एक वर्ष, सुपरवाइजरों के लिए डेढ़ वर्ष और तकनीशियनों के लिए दो वर्ष के प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाते हैं।
पिछले पांच वर्षों में बीएआरसी प्रशिक्षण स्कूलों में 917 ट्रेनी साइंटिफिक ऑफिसरों को प्रवेश दिया गया, जिनमें से 863 प्रशिक्षण पूरा कर वैज्ञानिक अधिकारी के रूप में नियुक्त हुए। इसके अतिरिक्त रेडियोग्राफी तकनीक और रेडियोलॉजिकल सेफ्टी के 15 पाठ्यक्रमों में 514 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और 446 को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
सरकार का कहना है कि इन कार्यक्रमों से परमाणु तकनीक में रोजगार, औद्योगिक क्षमता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।


