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अमित शाह 17 फरवरी को गांधीनगर में सहकारिता मंत्रियों की ‘मंथन बैठक’ की करेंगे अध्यक्षता

मंधन बैठक का एक प्रमुख फोकस दो लाख नए मल्टी-पर्पस प्राइमरी एग्रीकल्चर क्रेडिट सोसाइटीज (MPACS) स्थापित करने की प्रगति पर रहेगा

Published: 13:01pm, 16 Feb 2026

पीएम नरेन्द्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 17 फरवरी 2026 को गांधीनगर स्थित महात्मा मन्दिर में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्रियों की उच्चस्तरीय ‘मंथन बैठक’ को संबोधित करेंगे।

यह बैठक अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित की जाएगी। जिसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्री, अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। बैठक का उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करना और सहकारिता क्षेत्र में सुधारों को तेज करना है।

बैठक में सहकारिता मंत्रालय की प्रमुख पहलों की व्यापक समीक्षा की जाएगी। अब तक हुई प्रगति का आकलन होगा और राज्यों के बीच बेहतर कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान पर जोर दिया जाएगा। इस मंच के जरिए सहकारी संस्थाओं के आधुनिकीकरण, पारदर्शिता बढ़ाने और उन्हें अधिक प्रतिस्पर्धी एवं पेशेवर बनाने के लिए समयबद्ध रोडमैप तैयार करने पर विचार होगा।

बैठक का एक प्रमुख फोकस दो लाख नए मल्टी-पर्पस प्राइमरी एग्रीकल्चर क्रेडिट सोसाइटीज (MPACS) स्थापित करने की प्रगति पर रहेगा। साथ ही डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों के विस्तार के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने पर भी चर्चा होगी।

दुनिया की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना के तहत आधुनिक गोदामों के राष्ट्रीय नेटवर्क के विस्तार की प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी, ताकि किसानों की भंडारण क्षमता बढ़े, मूल्य स्थिरता सुनिश्चित हो और बाजार तक बेहतर पहुंच मिल सके।

बैठक में नवगठित तीन राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं- नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (NCEL), नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL) और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL) की भूमिका पर भी विचार-विमर्श होगा। इन संस्थाओं का उद्देश्य सहकारिता आधारित निर्यात को बढ़ावा देना, जैविक खेती को प्रोत्साहित करना और गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

नीतिगत मुद्दों पर भी चर्चा होगी, जिनमें 97वें संवैधानिक संशोधन के अनुरूप राज्य सहकारी कानूनों में समयबद्ध संशोधन और मॉडल सहकारी कानून अपनाना शामिल है। सहकारी चीनी मिलों की वित्तीय व्यवहार्यता, डेयरी क्षेत्र की स्थिरता और विकास, तथा नए डेयरी सहकारी संस्थानों के गठन पर भी विचार होगा, जिसमें अमूल और एनडीडीबी के साथ सहयोग शामिल है।

एजेंडे में दलहन और मक्का उत्पादन को बढ़ावा देना, सहकारी बैंकों की चुनौतियों का समाधान, साझा सेवा संस्थाओं (SSE) और अम्ब्रेला संरचनाओं को मजबूत करना, सदस्यता विस्तार, जागरूकता अभियान और मीडिया आउटरीच को बेहतर बनाने जैसे विषय भी शामिल हैं।

इसके अलावा PACS और RCS कार्यालयों के कंप्यूटरीकरण, नेशनल कोऑपरेटिव डाटाबेस के प्रभावी उपयोग, मानव संसाधन विकास और प्रशिक्षण तथा NCDC की योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा भी की जाएगी।

Diksha