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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 100 साल पुरानी CO-OPERATIVE BANK को MULTI-STATE दर्जा देने से किया इनकार

1919 में स्थापित इस बैंक ने दावा किया था कि उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड में उसकी लंबे समय से उपस्थिति है, इसलिए उसे बहु-राज्य दर्जा मिलना चाहिए।

Published: 17:03pm, 25 Sep 2025

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में द मैकेनिकल डिपार्टमेंट प्राइमरी को-ऑपरेटिव बैंक को बहु-राज्य (Multi-State) दर्जा देने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने केंद्रीय रजिस्ट्रार के 2018 के उस आदेश को सही ठहराया जिसमें बैंक की याचिका खारिज की गई थी।

न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति जयंती बनर्जी की खंडपीठ ने कहा कि बैंक यह साबित करने में विफल रहा कि उसके उद्देश्य एक राज्य से परे हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नियामक प्रधानता बरकरार रहेगी और किसी भी बैंक को राज्य की सीमाओं से बाहर विस्तार करने से पहले आरबीआई की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी।

1919 में स्थापित इस बैंक ने दावा किया था कि उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड में उसकी लंबे समय से उपस्थिति है, इसलिए उसे बहु-राज्य दर्जा मिलना चाहिए। लेकिन केंद्रीय रजिस्ट्रार ने कहा कि बैंक का न तो केंद्रीय कानूनों के तहत औपचारिक पंजीकरण है और न ही उसने आरबीआई के निर्देशों का पालन किया है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल ऐतिहासिक संचालन के आधार पर बहु-राज्य दर्जा नहीं मिल सकता। इसके लिए मल्टी-स्टेट को-ऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट और आरबीआई नियमों का पालन आवश्यक है, जिसमें राज्यों के बाहर विस्तार हेतु एनओसी लेना शामिल है।

साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि बैंक राज्य से बाहर के जमा खातों का संचालन केवल आरबीआई के दिशा-निर्देशों के तहत ही करे। हालांकि, कोर्ट ने यह विकल्प खुला छोड़ा कि बैंक चाहें तो एकल राज्य (Uni-State) सहकारी बैंक के रूप में दोबारा पंजीकरण करा सकता है।

Diksha

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