मुंबई: महाराष्ट्र सरकार मत्स्य क्षेत्र को कृषि का दर्जा मिलने के बाद District Central Cooperative Banks (DCCBs) की भूमिका मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। इसका उद्देश्य मछुआरों और मत्स्य सहकारी समितियों को आसान और किफायती ऋण उपलब्ध कराना है। इस पहल पर सिंधुदुर्ग जिला केंद्रीय सहकारी बैंक मुख्यालय में आयोजित कोंकण क्षेत्र के सहकारी बैंकों के लिए मत्स्य विकास योजनाओं पर एक दिवसीय कार्यशाला में चर्चा हुई।
कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए मत्स्य पालन मंत्री नितेश राणे ने कहा कि मत्स्य क्षेत्र को कृषि का दर्जा मिलने से मछुआरों के लिए जिला सहकारी बैंकों से ऋण प्राप्त करना आसान होगा। इससे उन्हें अपनी गतिविधियों का विस्तार करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने बताया कि NABARD ने मत्स्य क्षेत्र के लिए 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। महाराष्ट्र ने राज्य के मत्स्य व्यवसाय को मौजूदा 1,240 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2029 तक 5,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
सिंधुदुर्ग DCCB के अध्यक्ष मनीष दलवी ने मत्स्य सहकारी समितियों को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने और मछुआरों के बीच Kisan Credit Card की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संगठित वित्तीय सहायता से निजी व्यापारियों पर निर्भरता कम की जा सकती है। कार्यशाला को महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के प्रशासक विद्याधर अनास्कर और NABARD के CGM डॉ. ए.वी. भवानी शंकर ने भी संबोधित किया। यह पहल सहकारी बैंकिंग के जरिए मत्स्य क्षेत्र में निवेश, ऋण पहुंच और आर्थिक गतिविधियों को विस्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


