राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने कोझिकोड में आयोजित दक्षिण डेयरी एंड फूड कॉन्क्लेव 2026 के समापन सत्र का उद्घाटन एवं संबोधन किया। यह सम्मेलन इंडियन डेयरी एसोसिएशन (IDA) के साउथ चैप्टर द्वारा आयोजित किया गया था। अपने संबोधन में डॉ. शाह ने भारत की आर्थिक और सामाजिक यात्रा में डेयरी क्षेत्र की परिवर्तनकारी भूमिका को रेखांकित किया।
डॉ. शाह ने भारतीय डेयरी क्षेत्र के पिछले छह दशकों के विकास को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत एक दूध-अभावी देश से आज दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक बन गया है, जो वैश्विक दुग्ध उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने बताया कि यह उपलब्धि ‘ऑपरेशन फ्लड’ के तहत सहकारी मॉडल के माध्यम से संभव हुई, जिसकी परिकल्पना और मजबूत समर्थन भारत सरकार ने किया तथा राज्य सरकारों की सक्रिय भागीदारी और एनडीडीबी के निरंतर हस्तक्षेपों ने इसे सुदृढ़ बनाया।
उन्होंने कहा कि डेयरी सहकारिताओं ने किसानों को उचित मूल्य दिलाने, बिचौलियों को समाप्त करने, पारदर्शी आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने और लाखों छोटे एवं सीमांत किसानों को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई है। विशेष रूप से महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि डेयरी क्षेत्र की लगभग 80 प्रतिशत कार्यबल महिलाएं हैं।
डॉ. शाह ने कोविड-19 महामारी के दौरान डेयरी क्षेत्र की मजबूती और लचीलेपन का उल्लेख करते हुए कहा कि इस क्षेत्र ने ग्रामीण आजीविका, कृषि जीडीपी और भारत के दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने सहकारिताओं में महिलाओं के बढ़ते नेतृत्व और पशु स्वास्थ्य, प्रजनन, चारा, फीड तथा विस्तार सेवाओं जैसी एकीकृत सेवाओं की प्रभावी आपूर्ति के लिए मजबूत सहकारी नेटवर्क की सराहना की।
उन्होंने राष्ट्रीय डेयरी योजना (NDP) जैसी पहलों के तहत एनडीडीबी द्वारा किए गए बड़े पैमाने पर वैज्ञानिक हस्तक्षेपों का उल्लेख किया, जिनके माध्यम से संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों में देश के लगभग एक-तिहाई दुग्ध उत्पादन को समर्थन मिला है।
‘विकसित भारत 2047’ के विजन के अनुरूप भविष्य की चुनौतियों पर बात करते हुए डॉ. शाह ने प्रति पशु कम उत्पादकता, जलवायु परिवर्तन, बढ़ती लागत और सततता से जुड़ी आवश्यकताओं को प्रमुख बताया। उन्होंने उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रोजेनी टेस्टिंग, पेडिग्री सेलेक्शन, आरजीएम, जीनोमिक सेलेक्शन और सेक्स-सॉर्टेड सीमेन जैसी तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया। साथ ही श्वेत क्रांति 2.0 के तहत सहकारिताओं के विस्तार, मूल्य संवर्धन, डिजिटल परिवर्तन और नई पीढ़ी को डेयरी क्षेत्र से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. शाह ने एनडीडीबी की विभिन्न पहलों की जानकारी देते हुए बताया कि संस्थान गौसॉर्ट, गॉचिप, महिषचिप, आईवीएफ, चारा विकास, पशु स्वास्थ्य, मीथेन न्यूनीकरण, सीबीजी, आरबीपी, टीएमआर और परिपत्र खाद मूल्य श्रृंखला जैसे मॉडलों के माध्यम से नेट-जीरो उत्सर्जन की दिशा में कार्य कर रहा है।
अपने संबोधन के समापन में उन्होंने किसानों, सहकारिताओं, सरकारों, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने एनडीडीबी को एक उत्प्रेरक और ज्ञान साझेदार के रूप में दोहराते हुए कहा कि भारतीय डेयरी क्षेत्र का भविष्य समावेशी, सतत और किसान-केंद्रित होना चाहिए, ताकि ग्रामीण समृद्धि और राष्ट्रीय विकास को गति मिल सके। उन्होंने भारतीय डेयरी एसोसिएशन को डेयरी क्षेत्र में उसके निरंतर योगदान के लिए बधाई भी दी।


