सहकारिता मंत्रालय की दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की समीक्षा बैठक का गुरुवार को राजस्थान के उदयपुर में शुभारंभ हुआ। यह बैठक भारत की सहकारी व्यवस्था को और अधिक सशक्त, समावेशी एवं भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
उद्घाटन सत्र को सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने संबोधित किया। उन्होंने राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद करते हुए मंत्रालय की दृष्टि, प्राथमिकताओं और आगामी कार्ययोजना को साझा किया।
डॉ. भूटानी ने सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए चल रही प्रमुख पहलों पर प्रकाश डाला, जिनमें मॉडल उपविधियों (Model Bye-Laws) का कार्यान्वयन, सहकारी बैंकों में आरबीआई की भूमिका, सहकारी बैंक सुधार, बहुउद्देशीय पैक्स (Multi-Purpose PACS) का विस्तार तथा डेयरी क्षेत्र में प्रस्तावित हस्तक्षेप शामिल हैं। उन्होंने अगले दो दिनों के लिए चरणबद्ध और संरचित समीक्षा का रोडमैप प्रस्तुत किया।
“सहकार से समृद्धि” के लक्ष्य पर बल देते हुए डॉ. भूटानी ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सहकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समन्वित और सहभागी प्रयास सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने संस्थागत सुदृढ़ीकरण, हितधारकों की सक्रिय भागीदारी और सहकारिताओं को समावेशी एवं सतत विकास का मजबूत स्तंभ बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
दिन के दूसरे सत्र में पंकज कुमार बंसल, अपर सचिव और सिद्धार्थ जैन, संयुक्त सचिव के नेतृत्व में सहकारी क्षेत्र की चुनौतियों और जमीनी स्तर पर योजनाओं के कार्यान्वयन पर विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान उत्तर प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक द्वारा किए गए उल्लेखनीय कार्यों की सराहना की गई।
मंत्रालय के अधिकारियों ने राज्यों को व्यवसाय विविधीकरण, कंप्यूटर प्रशिक्षण, निधियों के त्वरित उपयोग, नवगठित पैक्स में ऋण एवं वाणिज्यिक गतिविधियों की शुरुआत तथा फरवरी–मार्च 2026 की समय-सीमा के भीतर डीसीसीबी संबद्धता प्रक्रियाओं को अनिवार्य रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए।
इसके बाद हुए सत्र में जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs) तथा एनसीओएल (NCOL), एनसीईएल (NCEL) और बीबीएसएसएल (BBSSL) से जुड़ी पहलों की व्यापक समीक्षा की गई। इस सत्र की अध्यक्षता पंकज कुमार बंसल, अपर सचिव ने की। उनके साथ रमन कुमार, संयुक्त सचिव, एस. सत्य, निदेशक और कुमार रामकृष्ण, निदेशक उपस्थित रहे।
समीक्षा में कमजोर और कम प्रदर्शन करने वाले डीसीसीबी को सशक्त बनाने, 11–12 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर सुनिश्चित करने तथा चयनित बैंकों में आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AEPS) लागू कर डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।


