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इफको इन तीन देशों में बनाएगा फर्टिलाइजर प्लांट, आपूर्ति बढ़ाने में मिलेगी मदद

देश में कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए देश की सबसे बड़ी फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव इफको उन देशों में ही फर्टिलाइजर प्लांट लगाने पर विचार कर रहा है जहां से कच्चे माल मंगवाए जाते हैं।  

इफको के उत्पाद केवल अधिकृत खुदरा विक्रेताओं के माध्यम से बेचे जा सकते हैं।


Published: 12:04pm, 18 Dec 2025

हाल के वर्षों में फसलों की बुवाई के समय खाद की किल्लत की खबरें अक्सर देशभर से आती रहती हैं। खासकर, कोरोना महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जबसे वैश्विक अनिश्चितता बढ़ी तब से इसमें तेजी आ गई। इसकी एक बड़ी वजह उर्वरक बनाने के लिए जरूरी कच्चे माल की समय पर आपूर्ति न होना और इस वजह से लागत बढ़ना भी है। इस समस्या के हल के लिए देश की सबसे बड़ी फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव इफको उन देशों में ही फर्टिलाइजर प्लांट लगाने की योजना बना रहा है जहां से कच्चे माल मंगवाए जाते हैं।

देश में कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए इफको श्रीलंका, जॉर्डन और सेनेगल में नए प्लांट स्थापित करने पर विचार कर रहा है। इन देशों में रॉक फॉस्फेट और फॉस्फोरिक एसिड जैसे आवश्यक कच्चे माल की प्रचुरता है, जिन्हें भारत बड़ी मात्रा में आयात करता है। इफको का मानना है कि यदि उत्पादन इकाइयां सीधे उन देशों में स्थापित की जाए जहां यह कच्चा माल आसानी से उपलब्ध है, तो भारत को स्थिर, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति मिल सकेगी।

इफको के एमडी केजे पटेल के अनुसार, आज वैश्विक स्तर पर खाद उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे पदार्थों की उपलब्धता चुनौतीपूर्ण हो गई है। कभी कीमतें बढ़ जाती हैं और कभी कच्चे माल की शिपमेंट में देरी हो जाती है। ऐसे में कच्चे माल के स्रोत वाले देशों में फर्टिलाइजर प्लांट लगाना सबसे प्रभावी समाधान है। इससे लागत भी कम होगी और आपूर्ति में स्थिरता भी आएगी।

श्रीलंका रॉक फॉस्फेट का बड़ा स्रोत

श्रीलंका रॉक फॉस्फेट का बड़ा स्रोत है, जिसका उपयोग डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) और फॉस्फोरिक एसिड बनाने में किया जाता है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में जहां कच्चे माल की उपलब्धता अनिश्चित है, श्रीलंका में नया प्लांट लगने से इफको को लगातार गुणवत्ता वाला कच्चा माल मिल सकेगा और उत्पादन में स्थिरता आएगी।

जॉर्डन में उत्पादन होगा दोगुना

जॉर्डन में इफको का पहले से ही एक बड़ा फर्टिलाइजर प्लांट है जिसकी उत्पादन क्षमता 5 लाख टन है। इसे बढ़ाकर अब 10 लाख टन करने की योजना है। यह विस्तार बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि जॉर्डन दुनिया के प्रमुख रॉक फॉस्फेट उत्पादक देशों में से एक है। उत्पादन क्षमता बढ़ने से भारत को अधिक डीएपी उपलब्ध हो सकेगा और बढ़ती घरेलू मांग को आसानी से पूरा किया जा सकेगा। इसी तरह, सेनेगल में इफको की आंशिक हिस्सेदारी पहले से मौजूद है। अब इफको या तो मौजूदा हिस्सेदारी बढ़ाएगी या एक नई यूनिट स्थापित करेगी। सेनेगल में भी रॉक फॉस्फेट के बड़े भंडार मौजूद हैं। यहां नया निवेश भारत की दीर्घकालीन खाद आपूर्ति सुरक्षा को मजबूत करेगा।

भारत में रॉक फॉस्फेट और फॉस्फोरिक एसिड का घरेलू उत्पादन लगभग नगण्य है, जिसके कारण इन्हें पूरी तरह विदेशों से आयात करना पड़ता है। हर साल भारत को करीब 10-11 लाख टन डीएपी की जरूरत पड़ती है, जिसमें से लगभग आधा हिस्सा आयात करना पड़ता है। वैश्विक तनाव, युद्ध, सप्लाई चेन में व्यवधान और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण भारत में डीएपी के उत्पादन की लागत बढ़ जाती है। विदेशों में कारखाने लगने से इन चुनौतियों को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। विदेशों में नए प्लांट लगने से भारत को कच्चा माल समय पर और कम लागत पर मिल सकेगा। इससे डीएपी और अन्य उर्वरकों की कीमतें स्थिर रहेंगी और किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध होगी।

YuvaSahakar Team