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भारत बना एशिया का एक्वाकल्चर सुपरपावर, मत्स्य उत्पादन में 167% वृद्धि

Published: 13:33pm, 03 Dec 2025

भारत ने एशिया की जलीय कृषि अर्थव्यवस्था में अपनी निर्णायक भूमिका को और मजबूत करते हुए अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। वर्ष 2014 में जहाँ देश का उत्पादन 1.5 मिलियन टन था, वहीं वर्ष 2023 में यह बढ़कर लगभग 4 मिलियन टन तक पहुँच गया। यह वृद्धि लगभग 167 प्रतिशत की उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाती है, जिसने भारत को एशिया में “वाइल्ड मछली से पाली गई मछली” की ओर बढ़ते बदलाव का सबसे बड़ा नेतृत्वकर्ता बना दिया है। यह जानकारी बंगाल की खाड़ी कार्यक्रम अंतर-सरकारी संगठन (BOBP-IGO) के निदेशक डॉ. पी. कृष्णन द्वारा चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम में साझा की गई।

महिलाएं बनीं मत्स्य क्षेत्र की प्रमुख शक्ति

जलीय कृषि क्षेत्र में रोजगार सृजन लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 1995 में जहाँ मत्स्य क्षेत्र कुल रोजगार का केवल 17 प्रतिशत प्रदान करता था, वहीं वर्ष 2020 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है। कटाई के बाद की प्रक्रियाओं में महिलाओं की भागीदारी 95 प्रतिशत तक पहुँच गई है। बावजूद इसके, इस अहम श्रम को अभी भी औपचारिक मान्यता और उचित मूल्यांकन की आवश्यकता है।

चीन, श्रीलंका सहित कई देशों में समुद्री मछली में गिरावट

एशिया विश्व के कुल मछली उत्पादन का 70 प्रतिशत से अधिक योगदान देता है। किंतु अध्ययन दर्शाते हैं कि चीन में 2015 से अब तक समुद्री लैंडिंग में 15–20 प्रतिशत की गिरावट आई है। श्रीलंका और मलेशिया भी इसी प्रकार लगातार कमी दर्ज कर रहे हैं। इस बदलते परिदृश्य में पाली गई मछली (Aquaculture) का महत्व तेजी से बढ़ा है।

भारत में 82% मछली घरेलू खपत के लिए

भारत झींगा निर्यात से अरबों डॉलर कमाता है, फिर भी अपनी कुल मछली का 82 प्रतिशत हिस्सा देश के पोषण और घरेलू खपत के लिए रखता है। इसी कारण Fish Loss & Waste एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है।

मछली की बर्बादी देश के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। अध्ययन के अनुसार, समुद्री मछली में नुकसान 2.78 प्रतिशत से बढ़कर 10 प्रतिशत से अधिक हो गया है, जबकि सूखी मछली में 37 प्रतिशत तक की हानि हो रही है। रिपोर्ट में विकेन्द्रीकृत कोल्ड-चेन, इंसुलेटेड बॉक्स, आधुनिक ड्राइंग तकनीक और स्वच्छ लैंडिंग सेंटरों में तत्काल निवेश की सिफारिश की गई है। FAO और BOBP-IGO की संयुक्त कार्यशाला में शामिल 12 एशियाई देशों के नीति-निर्माताओं ने इन सुझावों पर सहमति जताई है, जिससे मत्स्य क्षेत्र में उत्पादन, रोजगार और टिकाऊपन के नए द्वार खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।

YuvaSahakar Desk