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हरियाणा में डेयरी क्रांति: बावल में स्थापित होगा राज्य का सबसे बड़ा एवं अत्याधुनिक स्काडा आधारित मिल्क प्लांट

हरियाणा डेयरी डेवलपमेंट कोऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड रेवाड़ी के बावल में 16 एकड़ में राज्य का सबसे बड़ा एवं सातवाँ अत्याधुनिक SCADA आधारित वीटा मिल्क प्लांट स्थापित कर रहा है, जो दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाएगा तथा हजारों किसानों को स्थिर आय एवं गुणवत्ता आधारित मूल्य दिलवाएगा।

Published: 11:07am, 19 Nov 2025

हरियाणा सरकार राज्य की डेयरी प्रसंस्करण क्षमता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। डेयरी उद्योग को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा और तकनीकी रूप से उन्नत मिल्क प्लांट रेवाड़ी जिले के बावल क्षेत्र में स्थापित किया जा रहा है। हरियाणा डेयरी डेवलपमेंट कोऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (HDDCF) द्वारा तैयार किया जा रहा यह प्लांट 16 एकड़ में विकसित होगा और अत्याधुनिक स्काडा (Supervisory Control And Data Acquisition) प्रणाली से पूरी तरह स्वचालित रूप से संचालित होगा।

यह प्लांट न केवल राज्य की दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता को मजबूत करेगा, अपितु हजारों दुग्ध उत्पादक किसानों को स्थिर आय, बेहतर बाजार पहुंच और गुणवत्ता-आधारित मूल्य प्रदान करेगा।

वर्तमान में राज्य में छह वीटा मिल्क प्लांट संचालित हो रहे हैं। दूध की बढ़ती मांग तथा उत्पादन क्षमता के विस्तार को देखते हुए सातवाँ प्लांट बावल में स्थापित किया जा रहा है, जो तकनीकी रूप से सबसे आधुनिक होगा।

हरियाणा के डेयरी सेक्टर का ऐतिहासिक सफर

1970 से अब तक हरियाणा डेयरी डेवलपमेंट कोऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड ने निरंतर विस्तार किया है। पिछले 50 वर्षों में प्लांटों की क्षमता और आधुनिकता में कई गुना वृद्धि हुई है, जिसके परिणामस्वरूप दुग्ध उत्पादन में वृद्धि तथा किसानों की आय में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

हरियाणा में डेयरी विकास का सफर 1970 के दशक से निरंतर प्रगति पर रहा है। जींद में 1970–72 के दौरान स्थापित 1.50 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के पहले प्लांट से शुरू हुआ यह सफर अंबाला (1973–74) में 1.40 लाख लीटर, रोहतक (1976–77) में 4 लाख लीटर, बल्लभगढ़ (1979–80) में 1.25 लाख लीटर, सिरसा (1996–97) में 1.10 लाख लीटर और कुरुक्षेत्र (2014–15) में 20 हजार लीटर तक विस्तारित रहा है। समय के साथ डेयरी संयंत्रों की क्षमता बढ़ी, तकनीक सुधरी और किसानों की आमदनी मजबूत हुई।

बावल का नया प्लांट इन सभी से बड़ा एवं तकनीकी रूप से सबसे उन्नत होगा।

SCADA तकनीक क्या है और क्यों खास?

SCADA (Supervisory Control And Data Acquisition) एक कम्प्यूटर-आधारित प्रणाली है जो:

• उद्योगों की वास्तविक समय में निगरानी करती है

• उत्पादन प्रक्रिया को पूर्णतः स्वचालित करती है

• उपकरणों से निरंतर डेटा एकत्रित करती है

• गुणवत्ता नियंत्रण एवं मानकीकरण को बेहतर बनाती है

डेयरी प्लांट में इसका अर्थ है:

• दूध की सर्वोत्तम गुणवत्ता

• मानव त्रुटि में न्यूनतम

• अधिक स्वच्छ एवं सुरक्षित उत्पादन

• तेज गति एवं पूर्ण पारदर्शिता

किसानों को कैसे मिलेगा लाभ?

  1. दूध की अधिक खरीद: नए प्लांट से रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, गुरुग्राम, पलवल आदि आसपास के जिलों के किसानों का दूध सीधे खरीदा जाएगा।
  2. स्थिर एवं बेहतर मूल्य: फेडरेशन द्वारा निर्धारित दरों पर दूध बेचने से किसानों की आय स्थिर रहेगी।
  3. रोजगार के नए अवसर: प्लांट संचालन, सप्लाई चेन, परिवहन एवं तकनीकी सेवाओं में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा।
  4. गुणवत्ता आधारित भुगतान: SCADA प्रणाली से दूध की गुणवत्ता तत्काल जांचा जाएगा, जिससे उच्च गुणवत्ता वाले दूध पर किसानों को अधिक दर प्राप्त होगी।

राज्य सरकार का डेयरी विजन आत्मनिर्भरता, गुणवत्ता सुधार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने पर केंद्रित है। बावल में स्थापित होने वाला यह नया प्लांट इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और हरियाणा को डेयरी क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की पंक्ति में और मजबूत स्थान प्रदान करेगा।

YuvaSahakar Desk