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64 नई बहु-राज्य सहकारी समितियों का हुआ गठन, केरल, महाराष्ट्र व उत्तर प्रदेश अग्रणी

केरल ने 16 समितियों व महाराष्ट्र ने 15 समितियों के गठन के साथ पहला व दूसरा स्थान हासिल किया, वहीं उत्तर प्रदेश ने 14 समितियों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया है

Published: 12:52pm, 13 Nov 2025

देश में सहकारी क्षेत्र में तेजी से बढ़ती गतिविधियों के बीच इस वर्ष अब तक कुल 64 नई बहु-राज्य सहकारी समितियाँ (Multi-State Cooperative Societies – MSCS) गठित की गई हैं। इनमें केरल और महाराष्ट्र व उत्तर प्रदेश ने सबसे अधिक नई समितियों का गठन कर सहकारी आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई है।

केरल ने 16 समितियों व महाराष्ट्र ने 15 समितियों के गठन के साथ पहला व दूसरा स्थान हासिल किया। वहीं उत्तर प्रदेश ने 14 समितियों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया है। इसके अलावा राजस्थान (4), तमिलनाडु (3) और कर्नाटक (3) ने भी इस दिशा में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

अन्य राज्यों में दिल्ली और बिहार से 2-2, तथा हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तराखंड, गुजरात और ओडिशा से 1-1 समिति का गठन किया गया।

क्या हैं बहु-राज्य सहकारी समितियाँ ?

बहु-राज्यीय सहकारी समितियाँ (Multi-State Cooperative Societies) वे सहकारी संस्थाएँ होती हैं जो एक से अधिक राज्यों में काम करती हैं और विभिन्न राज्यों के लोगों, किसानों, व्यापारियों या उद्योगों को एक साथ जोड़ती हैं। इनका उद्देश्य संसाधनों का बेहतर उपयोग करना, किसानों और छोटे उत्पादकों को सीधी बाज़ार तक पहुँच देना, उत्पादन और वितरण में पारदर्शिता लाना और आर्थिक सहयोग के माध्यम से आत्मनिर्भरता बढ़ाना है। ऐसी समितियाँ कृषि, डेयरी, बैंकिंग, हस्तशिल्प, मत्स्य पालन, आवास और उपभोक्ता वस्तुओं जैसे कई क्षेत्रों में सक्रिय होती हैं। इन समितियों को बहु-राज्यीय सहकारी समिति अधिनियम, 2002 के तहत पंजीकृत किया जाता है और इनका संचालन केंद्रीय रजिस्ट्रार द्वारा किया जाता है। इनका मुख्य उद्देश्य “सहकार से समृद्धि” के मंत्र को साकार करते हुए, सामूहिक भागीदारी के ज़रिए देश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आर्थिक विकास को मज़बूती देना है।

Diksha

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