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सांची डेयरी का उन्नयन करेगा NDDB, सहकारिता से बढ़ेगा दुग्ध उत्पादन

मध्यप्रदेश में पशुपालन विभाग और राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) मिलकर सांची ब्रांड को उन्नत बना रहे हैं। सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि सहकारिता से समृद्धि का यह प्रयास प्रदेश को आत्मनिर्भर व सशक्त बनाएगा। इस अवसर पर दुग्ध उत्पादक किसानों और सहकारी समितियों को उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

Published: 11:21am, 13 Nov 2025

मध्यप्रदेश में सांची डेयरी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए पशुपालन विभाग और राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। भोपाल में आयोजित ‘सहकार से समृद्धि गोष्ठी’ के दौरान सहकारिता एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने इसकी घोषणा की।

विश्वास सारंग ने कहा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में सहकारिता के माध्यम से हर क्षेत्र में नवाचार हो रहा है। सहकारिता समाज को सुव्यवस्थित और संगठित करने का आधार है, जिसने देश और प्रदेश दोनों के विकास में अहम भूमिका निभाई है।

मंत्री ने कहा कि बनास डेयरी और अमूल जैसी संस्थाएं सहकारी मॉडल की उत्कृष्ट मिसाल हैं और अब सांची डेयरी को भी एनडीडीबी के सहयोग से नई ऊंचाई पर पहुंचाया जा रहा है। एनडीडीबी के माध्यम से सांची का उन्नयन किसानों की भागीदारी से संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि सहकारिता का उद्देश्य तभी पूरा होगा जब हम मिलकर कार्य करें और शक्तिशाली व समृद्ध भारत के निर्माण में योगदान दें।

पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने कहा कि दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुपालकों को सायलेज आहार के उपयोग के लिए प्रेरित करना जरूरी है। इससे पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा और दूध उत्पादन में वृद्धि होगी। उन्होंने एनडीडीबी द्वारा सांची डेयरी के उन्नयन के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

एमपीसीडीएफ के प्रबंध संचालक डॉ. संजय गोवाणी ने कहा कि एनडीडीबी ने दुग्ध उत्पादकों को उनका वाजिब मूल्य समय पर दिलाने की व्यवस्था की है और साथ ही ईआरपी सिस्टम लागू किया गया है जिससे पारदर्शिता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि किसानों को सहकार से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार और एमपीसीडीएफ मिलकर काम कर रहे हैं। वर्तमान में लक्ष्य रखा गया है कि प्रदेश के 50 प्रतिशत गांवों को सहकारी डेयरी से जोड़ा जाए। इसके तहत 26 हजार गांवों में सहकारी डेयरियां स्थापित करने और पांच साल में प्रतिदिन 52 लाख लीटर दूध संकलन तथा 35 लाख लीटर दूध विक्रय करने का लक्ष्य है।

एनडीडीबी के महाप्रबंधक (सहकारिता सेवाएं) राजेश गुप्ता ने कहा कि “सहकार से समृद्धि” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और समृद्ध मध्यप्रदेश के निर्माण का संकल्प है। उन्होंने कहा कि सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है और किसान को उत्पादन से विपणन तक की संपूर्ण व्यवस्था में सशक्त किया जा सकता है।

किसानों और सहकारी समितियों का सम्मान

कार्यक्रम में दुग्ध उत्पादक किसानों और उत्कृष्ट सहकारी समितियों को सम्मानित किया गया। दुग्ध उत्पादक श्रेणी में भोपाल दुग्ध संघ की प्रीति बाई दांगी को प्रथम पुरस्कार के रूप में ₹10,000 और प्रमाणपत्र दिया गया। उन्होंने वर्ष 2024-25 में 1,62,543 किलोग्राम दूध समिति में दिया। दूसरा पुरस्कार उज्जैन दुग्ध संघ के विशाल सिंह को ₹7,000 और प्रमाणपत्र के साथ मिला, जिन्होंने 71,240 किलोग्राम दूध दिया। तीसरा पुरस्कार इंदौर दुग्ध संघ के सावंत राम चौधरी को ₹5,000 और प्रमाणपत्र सहित दिया गया, जिन्होंने 54,300 किलोग्राम दूध समिति में दिया। सांत्वना पुरस्कार ग्वालियर दुग्ध संघ के गामराज गुर्जर को मिला जिन्होंने 18,250 किलोग्राम दूध समिति में दिया।

उत्कृष्ट सहकारी समितियों की श्रेणी में उज्जैन दुग्ध संघ की बालागुड़ा समिति को प्रथम पुरस्कार (₹10,000), भोपाल दुग्ध संघ की उलझावन समिति को द्वितीय पुरस्कार (₹7,000) और इंदौर दुग्ध संघ की कुडाना समिति को तृतीय पुरस्कार (₹5,000) मिला। बुंदेलखंड दुग्ध संघ की खजवा समिति को सांत्वना पुरस्कार दिया गया।

इस अवसर पर आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएं मनोज पुष्प, एनडीडीबी के महाप्रबंधक डॉ. पी.एस. पटेल, पश्चिमी क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रमुख वी. श्रीनिवास सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

YuvaSahakar Desk

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