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नीति आयोग ने जारी की “इंडिया ब्लू इकोनॉमी” रिपोर्ट, गहरे समुद्र में मत्स्य पालन को दी प्राथमिकता

रिपोर्ट के अनुसार भारत के पास महाद्वीपीय शेल्फ से आगे 2 मिलियन वर्ग किलोमीटर से अधिक का विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) है और 11,098 किलोमीटर लंबी तटरेखा (नौ तटीय राज्य और चार केंद्र शासित प्रदेश) के साथ गहरे समुद्र में मत्स्य संसाधनों के उपयोग की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं।

Published: 11:51am, 17 Oct 2025

भारत सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग ने सोमवार को “इंडिया ब्लू इकोनॉमी: स्ट्रेटेजी फॉर हार्नेसिंग डीप सी एंड ऑफशोर फिशरीज” शीर्षक से एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की। जिसमें गहरे समुद्र में मत्स्य पालन (Deep-Sea Fishing) के विकास के लिए एक व्यापक रणनीति प्रस्तुत की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार भारत के पास महाद्वीपीय शेल्फ से आगे 2 मिलियन वर्ग किलोमीटर से अधिक का विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) है और 11,098 किलोमीटर लंबी तटरेखा (नौ तटीय राज्य और चार केंद्र शासित प्रदेश) के साथ गहरे समुद्र में मत्स्य संसाधनों के उपयोग की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं।

नीति आयोग के मुताबिक भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है, जो वैश्विक उत्पादन में 8 प्रतिशत का योगदान देता है। यह क्षेत्र लगभग 3 करोड़ लोगों को आजीविका प्रदान करता है और वित्त वर्ष 2023-24 में 60,523 करोड़ रुपये के निर्यात से देश की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाता है।

नीति आयोग के CEO बी. वी. आर. सुब्रह्मण्यम ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र में गहरे समुद्र के मत्स्य संसाधन अभी तक काफी हद तक अनुपयोगी (unexploited) बने हुए हैं। रिपोर्ट में अनुमानित संभावित उपज (Potential Yield) 7.16 मिलियन टन बताई गई है, जिसमें पारंपरिक और गैर-पारंपरिक दोनों प्रकार के संसाधन शामिल हैं।

रिपोर्ट में तीन चरणों में विकास का रोडमैप भी सुझाया गया है-

  • चरण 1 (2025–28): प्रारंभिक विकास की नींव रखना और उसे बढ़ावा देना
  • चरण 2 (2029–32): वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना और प्राप्त करना
  • चरण 3 (2033 और आगे): स्थायी गहरे समुद्र मत्स्य पालन में वैश्विक नेतृत्व हासिल करना

नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने कहा कि “गहरे समुद्र और अपतटीय मत्स्य पालन के कारगर इस्तेमाल से न केवल समुद्री खाद्य निर्यात में वृद्धि होगी, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और तटीय मत्स्य संसाधनों पर दबाव कम होगा, जिससे इकोसिस्टम की स्थिरता सुनिश्चित की जा सकेगी।”

रिपोर्ट में छह प्रमुख नीतिगत हस्तक्षेपों की पहचान की गई है- नीतियों और विनियमों में सुधार, संस्थागत और क्षमता निर्माण को सशक्त बनाना, बेड़े का आधुनिकीकरण और अवसंरचना उन्नयन, स्थायी मत्स्य प्रबंधन को प्रोत्साहन, संसाधन और वित्तपोषण जुटाना, स्थानीय समुदाय की भागीदारी और साझेदारियों को बढ़ाना।

 

Diksha