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Champions Trophy: भारत ने पिछड़ने के बाद वापसी कर जापान को फाइनल में हरा जड़ा ‘खिताबी छक्का‘

एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता भारत ने शिलानंद लाकरा के 42वें मिनट में किए गोल से एक-एक की बराबरी पाने के बाद दिलप्रीत सिंह, जुगराज सिंह और विवेक सागर प्रसाद के एक-एक गोल की बदौलत फाइनल जीत के साथ खिताब बरकरार रख कर एशिया में अपनी श्रेष्ठता बरकरार रखी।

मोहाली। स्ट्राइकर शिलानंद लाकरा और दिलप्रीत सिंह के आक्रामक सेंटर हाफ विवेक सागर प्रसाद और हार्दिक सिंह के साथ बेहतरीन तालमेल वाले खेल की बदौलत पांच बार के चैंपियन भारत ने 42 मिनट तक एक गोल से पिछड़ने के बाद गजब की वापसी करते हुए जापान को पुरुष एशियन चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी के फाइनल में यहां ओलंपियन बलबीर सिंह सीनियर अंतर्राष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में बृहस्पतिवार को 4-1 से हरा खिताबी छक्का जड़ दिया। एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता भारत ने शिलानंद लाकरा के 42वें मिनट में किए गोल से एक-एक की बराबरी पाने के बाद दिलप्रीत सिंह, जुगराज सिंह और विवेक सागर प्रसाद के एक-एक गोल की बदौलत फाइनल जीत के साथ खिताब बरकरार रख कर एशिया में अपनी श्रेष्ठता बरकरार रखी।

मैन ऑफ द मैच शिलानंद लाकरा ने भारत के लिए बराबरी का गोल करने के साथ बराबर गोल के बेहतरीन अभियान बना कर स्टार स्ट्राइकर की भूमिका निभाई। भारत ने जापान पर राउंड लीग मैच की 4-1 की जीत को दोहराया। उधर, अबू कमल अजराई के दो तथा फित्रि सारी, फैजल सारी व कप्तान महरान जलील के एक-एक गोल से मलेशिया ने दक्षिण कोरिया को 5-2 से हरा कर कांसा जीता। पराजित दक्षिण कोारिया के लिए जियुनवू पार्क और सेमिन चुन ने एक-एक गोल किया।

फाइनल में भारत को तीन पेनल्टी कॉर्नर मिले और उसने दो को गोल में बदला, जबकि जापान को तीन पेनल्टी कॉर्नर मिले जो बेकार गए। भारत ने अपने स्टार स्ट्राइकर अभिषेक नैन को मैदान पर उतारा लेकिन उन्होंने पूरी तरह फिट नहीं होने के बावजूद अपनी ओर से मैदान पर कोई कसर नहीं छोड़ी। भारत की यह खिताबी जीत उसके आक्रामक सेंटर हाफ अपना 200वां अंतर्राष्ट्रीय मैच खेलने वाले हार्दिक सिंह और अपना आखिरी अंतर्राष्ट्रीय हॉकी मैच खेलने वाले नीलकांत शर्मा के लिए खास रही। दिलचस्प बात यह रही कि हार्दिक ने इसी मैदान पर 2013 में सरदार सिंह जैसे दिग्गज के सेंटर हाफ के रूप में खेलने की ठानी थी। संयोग से इसी मैदान पर हार्दिक ने अपना 200वां अंतर्राष्ट्रीय हॉकी मैच खेला।

भारत ने इससे पहले 2011, 2016, 2018, 2023, 2025 में भी पुरुष एशियन चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी खिताब जीता था। दुनिया के बेहतरीन कप्तान ड्रैग फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह और चीफ कोच क्रेग फुल्टन के मार्गदर्शन में भारत ने लगातार तीसरी बार खिताब जीत लिया। भारत 2018 में मस्कट (ओमान) में फाइनल के बारिश के चलते धुलने से पाकिस्तान के साथ संयुक्त विजेता रहा। साथ ही 2012 में उपविजेता और 2021 में तीसरे स्थान पर रहा है। 2025 में इनर मंगोलिया (चीन) में हरमनप्रीत सिंह की अगुआई में भारत ने अपनी नौजवान खिलाड़ियों से सज्जित डेवलेपमेंट टीम के साथ जुगराज सिंह के इकलौते गोल से चीन को फाइनल में हरा कर खिताब बरकरार रखा था।

हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी में एफआईएच पुरुष हॉकी विश्व कप में निराशाजनक प्रदर्शन कर आठवें स्थान पर रहने के बाद काकामिगहारा (जापान) में एशियाई खेलों में भारत ने मलेशिया को फाइनल में 5-1 से हरा कर पुरुष हॉकी का पहली बार स्वर्ण बरकरार रखा। भारत के सबसे अनुभवी खिलाड़ी आक्रामक सेंटर हाफ मनप्रीत सिंह पुट्ठे की मांसपेशी में खिंचाव के चलते टूर्नामेंट से बाहर हो गए थे। बावजूद इसके भारतीय टीम ने एक इकाई के रूप में खेल कर लगातार तीसरी बार खिताब जीत कर एशियन चैपियंस ट्रॉफी में अपनी श्रेष्ठता बरकरार रखी।

जापान के काजूमासा मात्सूमोतो ने फाइनल के तीसरे ही मिनट में बाएं से डी में घुसकर तेज वॉली जमा गोल कर जापान को 1-0 आगे कर भारत को चौंका दिया। नीलकांत शर्मा के पास पर डी के भीतर पहुंच कर नौवें मिनट में तेज शॉट जमाया लेकिन गोल नहीं कर पाई और भारत के हाथ बराबरी पाने का मौका फिसल गया। भारत के लिए हार्दिक सिंह ने अकेले ही गोल करने के कई प्रयास मिले लेकिन गोल करने में कामयाबी नहीं मिली। गेंद ज्यादा भारत के कब्जे में जरूर रही लेकिन उसके स्ट्राइकर सुखजीत सिंह, अभिषेक, शिलानंद लाकरा , अंगदबीर को डी के भीतर अपने किले की मजबूत चौकसी कर जापान ने शुरू के दो क्वॉर्टर में एक भी पेनल्टी कॉर्नर तक हासिल नहीं करने दिया। जापान ने दूसरे क्वॉर्टर में दो पेनल्टी कॉर्नर हासिल जरूर किए लेकिन एक को भी गोल में बदल नहीं पाई।

भारत को मैच के 33वें मिनट में पहला पेनल्टी कॉर्नर मिला लेकिन इस पर कप्तान हरमनप्रीत सिंह के ड्रैग फ्लिक के कोण को जापान के गोलरक्षक किशू किरोदा ने रोक भारत को बराबरी पाने से रोक दिया। अभिषेक के डी के भीतर पास पर मैच के 37वें मिनट में भारत के कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने डी में ही गेंद जापान के गोल के बाहर मार कर अपनी टीम को बराबरी दिलाने का मौका गंवा दिया। सुखजीत के पास डी के भीतर दिलप्रीत को गलत ढंग से रोकने पर भारत को दूसरा पेनल्टी कॉर्नर 41वें मिनट में मिला लेकिन इस पर हरमनप्रीत के फ्लिक को जापान के गोलरक्षक किशू किरोदा ने रोकने की कोशिश की लेकिन इस पर एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला। भारत ने हरमनप्रीत सिंह ने  इस पर सीधे शॉट न लेकर गेंद विवेक सागर की ओर सरका दी और इस पर उनसे मिली गेंद को दिलप्रीत सिंह की ओर बढ़ाया उनके पुश को गोलरक्षक किशू किरोदा ने रोकने की कोशिश की लेकिन वहीं खड़े शिलानंद लाकरा ने इस पुश पर लपक कर गोल में डाल कर भारत को 42वें मिनट में एक एक की बराबरी दिला दी। ऐसे में छोटे सरदार बच्चे की आंखों से खुशी के आंसू निकल गए और टेलिविजन की बड़ी स्क्रीन पर उसके आसुंओं ने मैदान पर मौजूद पूर्व ओलंपियन सहित सभी का ध्यान खींचा।

भारत के सुखजीत सिंह अगले ही मिनट गेंद को ले डी में पहुंचे लेकिन उनका निशाना बहुत करीब से चूक गया। दोनों टीमें तीसरे क्वॉर्टर की समाप्ति पर एक एक गोल से बराबर थी। अमनदीप लाकरा ने डी के भीतर गेंद को दिलप्रीत सिंह की ओर सरकाया और इस पर दिलप्रीत सिंह ने तेज रिवर्स हिट जमा गोल कर भारत को 48 मिनट में 2-1 से आगे कर दिया। जुगराज सिंह ने चौथे पेनल्टी कॉर्नर अचूक ड्रैगफ्लिक से गोल कर भारत को 53 वें मिनट 3-1 से आगे कर जीत की ओर अग्रसर कर दिया। शिलानंद लाकरा के शॉट को अगले ही मिनट जापान के गोलरक्षक किशू किरोदा ने रोकने की कोशिश की लेकिन विवेक सागर प्रसाद  ने भारत को 4-1 से आगे कर उसकी जीत निश्चित कर कर दी।

YuvaSahakar Team