देशभर में 55,500 से अधिक प्राथमिक कृषि ऋण समितियां यानी PACS अब कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में काम कर रही हैं और ग्रामीण नागरिकों को 300 से अधिक डिजिटल व जनसेवा सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं। सहकारिता मंत्रालय ने इसे PACS से प्रगति अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल पहुंच बढ़ाने की महत्वपूर्ण पहल बताया है।
इन केंद्रों के माध्यम से बैंकिंग, बीमा, आधार नामांकन व अपडेट, पैन कार्ड सेवाएं, स्वास्थ्य सेवाएं तथा रेल, बस और हवाई टिकट बुकिंग जैसी सुविधाएं गांव स्तर पर उपलब्ध हो रही हैं। इससे ग्रामीण लोगों को सामान्य सेवाओं के लिए दूर शहरों और कस्बों तक जाने की जरूरत कम हो रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2026 तक 55,514 PACS ने CSC सेवाएं शुरू कर दी थीं। नवंबर 2024 में यह संख्या 40,214 थी। यह बढ़ोतरी ग्रामीण डिजिटल समावेशन में सहकारी संस्थाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
यह कार्यक्रम सहकारिता मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, नाबार्ड और CSC e-Governance Services India Limited के सहयोग से लागू किया जा रहा है। इसके साथ PACS के पारंपरिक कृषि ऋण संबंधी दायरे को भी विस्तार दिया जा रहा है।
मॉडल उपविधियों के तहत PACS को 25 से अधिक व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने की अनुमति दी गई है। PACS कंप्यूटरीकरण और ERP प्लेटफॉर्म से लेखांकन, पारदर्शिता और संचालन दक्षता में सुधार का भी लक्ष्य है।
इस पहल से PACS को अतिरिक्त आय के अवसर मिलने के साथ ग्रामीण परिवारों को वित्तीय समावेशन, डिजिटल सेवाओं और आवश्यक नागरिक सुविधाओं तक स्थानीय स्तर पर बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है।


