टेक कंपनी HP के Futures 2026 ग्लोबल सर्वे के अनुसार भारत के अधिकांश छात्र मानते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पढ़ाई और असाइनमेंट से जुड़े कार्यों को तेजी से पूरा करने में मदद करता है, लेकिन इसके अधिक इस्तेमाल से विषय को गहराई से समझने और सीखने की क्षमता प्रभावित होने की चिंता भी बनी हुई है।
सर्वे में सामने आया कि भारतीय छात्र AI को उपयोगी उपकरण के रूप में देखते हैं, खासकर जानकारी जुटाने, ड्राफ्ट तैयार करने और काम की गति बढ़ाने के लिए। इसके बावजूद वे पारंपरिक अध्ययन पद्धतियों का महत्व कम नहीं मानते। करीब 82 प्रतिशत भारतीय छात्रों ने कहा कि जब वे पढ़ी हुई सामग्री को लंबे समय तक याद रखना चाहते हैं, तो हस्तलिखित नोट्स बनाने या प्रिंटेड सामग्री पढ़ने को प्राथमिकता देते हैं।
यह रुझान बताता है कि छात्र डिजिटल सुविधा और पारंपरिक अध्ययन के बीच संतुलन बनाना चाहते हैं। AI से समय बचता है, लेकिन कई छात्रों को आशंका है कि तैयार उत्तरों और स्वचालित सहायता पर अधिक निर्भरता से विश्लेषण, समझ और स्वतंत्र सोच कमजोर हो सकती है।
सर्वे के अनुसार भविष्य के रोजगार बाजार को लेकर छात्रों की सोच भी संतुलित है। वे मानते हैं कि AI कौशल महत्वपूर्ण होंगे, लेकिन केवल तकनीकी दक्षता पर्याप्त नहीं होगी। रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच, समस्या समाधान, संचार और स्वतंत्र निर्णय लेने जैसी टिकाऊ मानवीय क्षमताएं भी करियर में समान रूप से जरूरी रहेंगी।
HP Futures 2026 के निष्कर्ष संकेत देते हैं कि भविष्य की शिक्षा में AI को सहायक उपकरण के रूप में अपनाने के साथ गहरी सीख, स्मरण क्षमता और मानवीय कौशल के विकास पर भी समान ध्यान देना जरूरी होगा।


