कर्नाटक स्टेट कोऑपरेटिव एपेक्स बैंक में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की कथित ऋण अनियमितताओं का मामला कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस संबंध में दायर जनहित याचिका में व्यापक जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
पवन कुमार द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि बैंक ने गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए ऋण स्वीकृत किए। साथ ही ऐसे खातों को भी नया ऋण दिया गया जिन्हें पहले ही गैर-निष्पादित परिसंपत्ति यानी एनपीए के रूप में वर्गीकृत किया जा चुका था। याचिका में बैंकिंग से जुड़े वैधानिक नियमों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है।
याचिकाकर्ता ने सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार पर भी कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है। याचिका के अनुसार ऑडिट में सामने आए बिंदुओं और फरवरी 2026 में दी गई शिकायत के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने आवश्यक कार्यवाही शुरू नहीं की।
पीआईएल में कर्नाटक सहकारी समितियां अधिनियम के तहत जांच, निरीक्षण और सरचार्ज कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई है। इसके साथ ही संबंधित ऋण रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का अनुरोध भी किया गया है ताकि जांच के दौरान आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध रहें।
याचिका में निजी कंपनियों, शैक्षणिक ट्रस्टों और चीनी मिलों से संबंधित ऋण लेनदेन पर भी सवाल उठाए गए हैं।
हालांकि इन आरोपों पर अभी न्यायालय ने कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। मामले में लगाए गए आरोप न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं और आगे की स्थिति हाईकोर्ट की सुनवाई तथा संबंधित पक्षों के जवाब के बाद स्पष्ट होगी।


