बहु-राज्य सहकारी समितियों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने लेखापरीक्षा के नियमों को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सहकारिता मंत्रालय ने बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी (लेखापरीक्षक की रिपोर्ट) आदेश, 2026 यानी MSCARO 2026 अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत समितियों के वित्तीय लेन-देन, कर्ज, जमाराशियों और प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की निर्धारित प्रारूप में जांच और रिपोर्टिंग की जाएगी। आदेश की घोषणा 14 अक्टूबर को की गई।
इस व्यवस्था का सबसे अहम पहलू यह है कि अब लेखापरीक्षा रिपोर्ट में केवल औपचारिक जानकारी देने के बजाय वित्तीय स्थिति और वैधानिक अनुपालन से जुड़े निर्धारित सवालों पर स्पष्ट ‘हाँ’ या ‘नहीं’ में जवाब देना होगा। जरूरत पड़ने पर लेखापरीक्षक को संबंधित टिप्पणी भी दर्ज करनी होगी। इससे अनियमितताओं की पहचान और समितियों के कामकाज का आकलन पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित हो सकेगा।
वित्तीय जोखिम छिपाना होगा मुश्किल
नई व्यवस्था में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA), अतिदेय ऋणों, तरलता, जमाराशियों, अग्रिमों और कर्ज चुकाने में चूक जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन जानकारियों के आधार पर नियामक यह पहचान सकेंगे कि किन समितियों की वित्तीय स्थिति या प्रशासनिक व्यवस्था में अधिक जोखिम मौजूद है।
ऐसी समितियों के निरीक्षण और जांच को प्राथमिकता देने में केंद्रीय सहकारी समितियों के पंजीयक (CRCS) को मदद मिलेगी। इसका उद्देश्य संभावित वित्तीय संकट की शुरुआती पहचान कर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाने का अवसर उपलब्ध कराना है।
सदस्यों के पैसे और प्रबंधन पर भी रहेगी नजर
MSCARO 2026 के तहत शेयर पूंजी, निवेश, धनराशि के इस्तेमाल, सदस्यता रिकॉर्ड और जरूरी वैधानिक मंजूरियों की जांच की जाएगी। निदेशक मंडल की संरचना, निदेशकों की पात्रता, वार्षिक आम सभाओं, बोर्ड बैठकों और संबंधित पक्षों के साथ लेन-देन से जुड़े नियमों के अनुपालन पर भी ध्यान दिया जाएगा।
इससे सहकारी संस्थाओं में निर्णय लेने की प्रक्रिया और प्रबंधन की जवाबदेही को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। जहां लागू होगा, वहां साइबर सुरक्षा और धन शोधन निवारण संबंधी अनुपालन की भी जांच की जाएगी।
पहले बड़ी समितियां होंगी शामिल
नई व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। शुरुआती चरण में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक वित्तीय आकार वाली बड़ी सहकारी समितियों को इसके दायरे में लाने का प्रावधान है। दीर्घकाल में निर्धारित 50 करोड़ रुपये की वित्तीय सीमा से अधिक वाली समितियों तक इसका विस्तार करने का लक्ष्य है।
मानकीकृत ऑडिट रिपोर्ट को CRCS पोर्टल से जोड़ने की भी परिकल्पना की गई है। इससे डिजिटल निगरानी, स्वचालित जांच और जोखिम मूल्यांकन की संभावनाएं बढ़ेंगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ विजन और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में लाई गई यह व्यवस्था सहकारी क्षेत्र में वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, इसकी वास्तविक प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि लेखापरीक्षा में सामने आने वाली कमियों पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है।


