महाराष्ट्र के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल को लातूर जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के निदेशक पद से हटाने का भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने निर्देश दिया है। मामला बैंक के निदेशक पद पर निर्धारित अधिकतम कार्यकाल की सीमा से जुड़ा है। पाटिल महाराष्ट्र सरकार में सहकारिता मंत्री हैं।
विवाद की शुरुआत पूर्व बैंक कर्मचारी सतीश शेषराव जाधव की 25 मई 2026 की शिकायत से हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पाटिल सहित बैंक के आठ निदेशक निर्धारित कार्यकाल सीमा से अधिक समय तक पद पर रहे। मामला बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ पहुंचा, जिसने RBI को शिकायत पर गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेने को कहा।
इसके बाद RBI ने संबंधित आठ निदेशकों से जवाब मांगा। सात निदेशकों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जबकि बाबासाहेब पाटिल निदेशक पद पर बने रहे। RBI के 18 सितंबर के आदेश के संबंध में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार बैंक को पाटिल को निदेशक पद से तत्काल हटाने का निर्देश दिया गया।
पाटिल ने कार्यकाल संबंधी प्रावधान की व्याख्या पर सवाल उठाया है। उनका तर्क रहा है कि बाद में लागू किए गए प्रावधानों को पहले से जारी कार्यकाल पर लागू करने के कानूनी पहलू की जांच होनी चाहिए। इस मुद्दे पर उनकी आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर मीडिया रिपोर्टों में अलग-अलग विवरण सामने आए हैं—कुछ रिपोर्टों में हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है जबकि PTI की एक बाद की रिपोर्ट में उनके हवाले से कहा गया कि वे RBI आदेश को चुनौती नहीं देंगे, लेकिन नियम के लागू होने के तरीके की समीक्षा जरूरी है।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सहकारिता विभाग के मंत्री स्वयं सहकारी बैंक के निदेशक कार्यकाल से जुड़े नियामकीय प्रावधान के दायरे में आए हैं। RBI की कार्रवाई ने सहकारी बैंकों में निदेशकों के कार्यकाल और नियामकीय अनुपालन के मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है।


