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MBBS, BDS या BAMS? जानिए किस मेडिकल कोर्स में है बेहतर करियर

MBBS, BDS और BAMS तीनों ही अपने-अपने क्षेत्र में बेहतर करियर के अवसर प्रदान करते हैं

Published: 13:22pm, 07 Aug 2026

हर साल लाखों छात्र-छात्राएं डॉक्टर बनने का सपना लेकर NEET UG परीक्षा में शामिल होते हैं। परीक्षा का रिजल्ट आने और कटऑफ जारी होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि MBBS, BDS और BAMS में से किस कोर्स का चयन किया जाए। बेहतर रैंक वाले छात्रों की पहली पसंद आमतौर पर MBBS होती है, लेकिन मनचाहा सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं मिलने पर कई छात्र BDS और BAMS जैसे विकल्पों पर विचार करते हैं। ऐसे में सही जानकारी के अभाव में लिया गया फैसला भविष्य में पछतावे की वजह बन सकता है।

MBBS, BDS और BAMS तीनों ही मेडिकल क्षेत्र की प्रमुख डिग्रियां हैं, लेकिन इनका अध्ययन और कार्यक्षेत्र अलग-अलग है। MBBS में आधुनिक चिकित्सा पद्धति (एलोपैथी), शरीर की संरचना, बीमारियों के उपचार और सर्जरी की पढ़ाई कराई जाती है। वहीं BDS पूरी तरह दांत, मसूड़ों, जबड़ों और मुंह से जुड़ी बीमारियों के इलाज तथा डेंटल सर्जरी पर केंद्रित होता है। दूसरी ओर BAMS में आयुर्वेदिक चिकित्सा, जड़ी-बूटियों, पंचकर्म जैसी पारंपरिक उपचार पद्धतियों के साथ आधुनिक चिकित्सा की भी पढ़ाई कराई जाती है।

तीनों कोर्स में प्रवेश का माध्यम NEET UG परीक्षा ही है। उम्मीदवार का 12वीं कक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी विषयों के साथ न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक होना जरूरी है। MBBS में प्रवेश के लिए सबसे अधिक कटऑफ और बेहतर रैंक की आवश्यकता होती है, जबकि BDS की कटऑफ इससे कुछ कम रहती है। वहीं BAMS में भी NEET क्वालिफाई करना अनिवार्य है, लेकिन इसकी कटऑफ अपेक्षाकृत कम होती है।

कोर्स की अवधि लगभग समान है। MBBS और BAMS की पढ़ाई साढ़े चार साल की होती है, जिसके बाद एक साल की अनिवार्य इंटर्नशिप करनी होती है। BDS में चार साल की पढ़ाई के बाद एक साल की इंटर्नशिप होती है। फीस के मामले में सरकारी और निजी कॉलेजों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिलता है। सरकारी संस्थानों में फीस अपेक्षाकृत कम होती है, जबकि निजी कॉलेजों में पढ़ाई पर लाखों रुपये तक खर्च करना पड़ सकता है।

करियर की बात करें तो MBBS करने वाले छात्र मेडिकल ऑफिसर, जूनियर रेजीडेंट और आगे चलकर MD या MS करने के बाद विशेषज्ञ डॉक्टर या सर्जन बन सकते हैं। BDS के बाद डेंटल सर्जन, ऑर्थोडॉन्टिस्ट या अपना निजी डेंटल क्लिनिक शुरू करने का विकल्प मिलता है। वहीं BAMS करने वाले छात्र आयुर्वेदिक डॉक्टर, हेल्थ कंसल्टेंट, रिसर्च ऑफिसर या अपना पंचकर्म सेंटर और क्लिनिक संचालित कर सकते हैं। हाल के वर्षों में आयुर्वेद और वेलनेस सेक्टर की बढ़ती लोकप्रियता के कारण इस क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर तेजी से बढ़े हैं।

शुरुआती वेतन की बात करें तो MBBS डॉक्टरों को आमतौर पर 60 हजार से एक लाख रुपये प्रतिमाह तक वेतन मिल सकता है। BDS करने वाले उम्मीदवारों की शुरुआती आय 25 हजार से 45 हजार रुपये प्रतिमाह के बीच होती है, जबकि अपना क्लिनिक स्थापित होने पर कमाई काफी बढ़ सकती है। BAMS डॉक्टरों को शुरुआती दौर में 30 हजार से 50 हजार रुपये प्रतिमाह तक वेतन मिल सकता है और अनुभव के साथ आय में लगातार वृद्धि होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी मेडिकल कोर्स का चयन केवल करियर या सैलरी को देखकर नहीं, बल्कि अपनी रुचि और भविष्य के लक्ष्य को ध्यान में रखकर करना चाहिए। MBBS, BDS और BAMS तीनों ही अपने-अपने क्षेत्र में बेहतर करियर के अवसर प्रदान करते हैं। सही जानकारी और अपनी पसंद के आधार पर लिया गया फैसला ही भविष्य में सफलता की मजबूत नींव बन सकता है।

YuvaSahakar Desk