मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने डीपफेक, भ्रामक सामग्री और कंटेंट मॉडरेशन में हुई गड़बड़ियों को लेकर कंपनी की चूक स्वीकार करते हुए माफी मांगी है। उन्होंने माना कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कई मामलों में हानिकारक सामग्री की समय पर पहचान और रोकथाम नहीं कर पाए, जिससे उपयोगकर्ताओं का भरोसा प्रभावित हुआ।
यह स्वीकारोक्ति ऐसे समय आई है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डीपफेक और एआई से तैयार फर्जी सामग्री के खतरों पर चिंता जता रहे हैं। मोदी ने कहा है कि ऐसी तकनीक का उपयोग मानव कल्याण के लिए होना चाहिए तथा एआई व्यवस्था पारदर्शी, सुरक्षित और नैतिक होनी चाहिए। उन्होंने भ्रामक सामग्री पर वॉटरमार्क और उसके स्रोत की स्पष्ट पहचान जैसे उपायों की जरूरत भी रेखांकित की है।
संसदीय समिति ने भी डीपफेक और एआई के दुरुपयोग से निपटने के लिए साइबर कानूनों को मजबूत करने, सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय करने और अवैध सामग्री पर कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की है। जुकरबर्ग ने भरोसा दिलाया कि मेटा पहचान तकनीक, स्पष्ट लेबलिंग और शिकायत निवारण व्यवस्था को बेहतर बनाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि माफी तभी सार्थक होगी, जब कंपनी ठोस, पारदर्शी और स्थायी सुधार लागू कर फर्जी सामग्री के प्रसार को प्रभावी ढंग से रोकेगी।
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